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हिमाचल में आईएएस, आईएफएस और आईपीएस पदों में कटौती की तैयारी, सुक्खू बोले- जरूरत से ज्यादा अधिकारी

हिमाचल प्रदेश सरकार आईएएस, आईएफएस और आईपीएस अधिकारियों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में जरूरत से ज्यादा अधिकारी हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार आईएएस, आईएफएस और आईपीएस पदों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि राज्य में जरूरत से ज्यादा अधिकारी हैं।

एक प्रस्ताव के तहत आईएएस अधिकारियों की संख्या 153 से घटाकर 130 करने की तैयारी है, यानी 23 पद कम किए जाएंगे। वहीं आईएफएस अधिकारियों की संख्या 118 से घटाकर 83 करने का प्रस्ताव है, जिससे 35 पदों की कमी होगी। आईपीएस पदों में कितनी कटौती की जाएगी, इसका अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

हिमाचल प्रदेश सरकार का यह कदम प्रशासनिक खर्च कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय वन सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की संख्या को राज्य की वास्तविक जरूरत के अनुरूप करने पर विचार कर रही है।

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 153 आईएएस अधिकारी हैं। इनमें से कई अधिकारियों को अपेक्षाकृत छोटे विभागों में तैनात किया गया है, जहां उनकी विशेषज्ञता का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाता। इसलिए सरकार आईएएस कैडर की संख्या 153 से घटाकर 130 करना चाहती है।

सुक्खू ने कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय आईएएस अधिकारियों की संख्या 110 तक लाने की है, लेकिन पहले चरण में केवल 23 पदों की कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को अधिकारियों की बड़ी संख्या नहीं, बल्कि ऐसी प्रशासनिक टीम चाहिए जो नीतियों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सके।

उन्होंने बताया कि आईपीएस कैडर में भी कटौती की जा रही है, जबकि आईएफएस कैडर को पहले ही 117 से घटाकर 83 किया जा चुका है। सरकार को उम्मीद है कि कैडर की संख्या कम करने से राजस्व व्यय में लगभग 100 से 150 करोड़ रुपये की बचत होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति जारी रहेगी और ऐसे मामलों में उन्हें तत्काल अनुमति दी जाएगी।

अधिकारियों के मुताबिक, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की संख्या घटाने का औपचारिक प्रस्ताव जल्द केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। फिलहाल 20 से अधिक आईएएस तथा एक दर्जन से अधिक आईपीएस और आईएफएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर हैं। कुछ अधिकारी राज्य में कैडर से बाहर के पदों पर भी तैनात हैं।

सरकार केंद्र से यह अनुरोध भी कर सकती है कि राज्य में आगे अतिरिक्त केंद्रीय सेवा अधिकारियों की तैनाती न की जाए। अनुमान के अनुसार, एक अधिकारी के वेतन, महंगाई भत्ते, संबद्ध कर्मचारियों और अन्य सुविधाओं पर सालाना करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च होते हैं।

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