वैश्विक वायु शक्ति में भारत तीसरे स्थान पर, चीन की PLAAF से पांचवीं बार आगे रही भारतीय वायुसेना
डब्ल्यूडीएमएमए की 2026 रैंकिंग में भारत दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली सैन्य विमानन शक्ति बना। भारतीय वायुसेना चीन की पीएलएएएफ से लगातार पांचवीं बार आगे रही।
भारत ने वैश्विक सैन्य विमानन शक्ति के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट (डब्ल्यूडीएमएमए) की 2026 ग्लोबल एयर पावर्स रैंकिंग के अनुसार, भारत दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली सैन्य विमानन शक्ति बनकर उभरा है। देश के स्तर पर सैन्य विमानन क्षमता का आकलन करने पर भारत से आगे केवल अमेरिका और रूस हैं।
वहीं, अलग-अलग सैन्य विमानन शाखाओं की रैंकिंग में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) को दुनिया में छठा स्थान मिला है। इस सूची में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (पीएलएएएफ) सातवें स्थान पर है। यह पांचवीं बार है जब 2022 के बाद भारतीय वायुसेना ने चीन की वायुसेना को पीछे छोड़ा है।
डब्ल्यूडीएमएमए की रैंकिंग में अमेरिका को एक देश के रूप में नहीं, बल्कि उसकी अलग-अलग सैन्य शाखाओं के आधार पर शामिल किया गया है। अमेरिकी वायुसेना, नौसेना, थल सेना और मरीन कॉर्प्स की विमानन शाखाओं को अलग-अलग स्थान दिया गया है। इसी वजह से व्यक्तिगत शाखाओं की सूची में भारतीय वायुसेना छठे स्थान पर है।
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रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना के पास कुल 1,716 विमान हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या लड़ाकू विमानों की है। आईएएफ के पास सात प्रकार के करीब 542 लड़ाकू विमान हैं। इसके अलावा हेलीकॉप्टर बेड़े में 498 विमान शामिल हैं, जिनमें 222 एमआई-17 और 111 एचएएल ध्रुव व रुद्र हेलीकॉप्टर प्रमुख हैं।
भारतीय वायुसेना की मजबूत रैंकिंग का एक बड़ा कारण उसकी परिचालन क्षमता भी है। भारतीय पायलट दुनिया के सबसे कठिन इलाकों, जैसे ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों और हिंद महासागर में लंबी दूरी के अभियानों में नियमित रूप से भाग लेते हैं।
भारत की इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों जैसी स्वदेशी क्षमताओं ने वायुसेना की ताकत को और बढ़ाया है।
हालांकि चीन के पास भारत से कहीं ज्यादा विमान हैं। पीएलएएएफ के पास 3,700 से अधिक विमान हैं और वह जे-20 स्टील्थ फाइटर जैसे अत्याधुनिक विमानों को शामिल कर रहा है। लेकिन डब्ल्यूडीएमएमए के अनुसार केवल संख्या से किसी वायुसेना की वास्तविक क्षमता तय नहीं होती।
रैंकिंग तैयार करने के लिए डब्ल्यूडीएमएमए ने ट्रूवैल रेटिंग (टीवीआर) प्रणाली का इस्तेमाल किया है, जिसमें बेड़े का आकार, आधुनिकता, लॉजिस्टिक क्षमता, विशेष विमान, प्रशिक्षण, घरेलू उत्पादन और युद्ध संचालन क्षमता जैसे कई मानकों को शामिल किया जाता है।
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