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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से कार, चॉकलेट और बिस्कुट होंगे सस्ते; निर्यातकों और आम लोगों को मिलेगा फायदा

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से कई उत्पादों पर आयात शुल्क घटेगा। कार, चॉकलेट, बिस्कुट और व्हिस्की सस्ती हो सकती हैं। भारतीय निर्यातकों, किसानों और उद्योगों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ ऐतिहासिक व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) जुलाई 15 से लागू होगा। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। अनुमान के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच कुल व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि वर्तमान व्यापार लगभग 55-60 अरब डॉलर के बीच है।

इस समझौते के तहत भारत के कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न एवं आभूषण और प्लास्टिक उत्पादों का ब्रिटिश बाजार में प्रवेश शून्य शुल्क पर हो सकेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार एवं निवेश को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय किसान, श्रमिक, एमएसएमई, स्टार्टअप और नवाचार करने वाले युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।

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समझौते के बाद ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क धीरे-धीरे कम होगा। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को ब्रिटिश कार, इलेक्ट्रिक वाहन, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स, व्हिस्की और मशीनरी जैसी वस्तुएं पहले की तुलना में सस्ती मिल सकती हैं।

फिलहाल भारत में स्कॉच व्हिस्की पर 150 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है। नए समझौते के तहत इसे पहले घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा और अगले 10 वर्षों में इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इसी तरह ब्रिटिश कारों पर लगने वाला शुल्क भी 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक किया जाएगा।

इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। भारत अपने लगभग 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन में बिना आयात शुल्क के भेज सकेगा। इससे कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, समुद्री उत्पाद, चमड़ा, जूते, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान और रत्न-आभूषण क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि, सरकार ने डेयरी उत्पाद, चीनी, चावल, सेब, पनीर, चिकन, पोर्क और अंडे जैसे कई कृषि उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है ताकि भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग को सस्ते विदेशी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा से बचाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा और वर्ष 2040 तक द्विपक्षीय व्यापार में लगभग 39 प्रतिशत वृद्धि ला सकता है।

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