यौन उत्पीड़न के आरोपों पर जेएनयू के प्रोफेसर बर्खास्त, आंतरिक समिति की जांच के बाद कार्रवाई
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने छात्राओं की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की जांच के बाद एक प्रोफेसर को बर्खास्त किया। दिल्ली महिला आयोग ने भी पहले मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद एक प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार, संबंधित प्रोफेसर सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र में पढ़ाते थे। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच और उसकी सिफारिशों के आधार पर की गई है।
आंतरिक समिति ने की जांच
विश्वविद्यालय के कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा गया है कि आंतरिक समिति ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच की और अपने निष्कर्षों के आधार पर कड़ी सजा देने की सिफारिश की।
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आदेश के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद प्रोफेसर को विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। इसमें सेवा संबंधी नियमों और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के नियम 11(ix) का भी उल्लेख किया गया है।
छात्राओं ने लगाए गंभीर आरोप
विश्वविद्यालय की कई छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों के अनुसार, प्रोफेसर कथित तौर पर छात्राओं को अपने आवास पर बैठक के लिए बुलाते थे, जहां उनके साथ अनुचित व्यवहार किए जाने के आरोप लगे। कुछ छात्राओं ने कक्षाओं के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने की भी शिकायत की।
सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति को करीब एक महीने पहले शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई। इससे पहले मई में 11 छात्राओं ने भी प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
दिल्ली महिला आयोग ने मांगी थी रिपोर्ट
पिछले महीने दिल्ली महिला आयोग ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जेएनयू से कार्रवाई का विवरण मांगा था। आयोग ने कुलपति को तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। इसमें कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम यानी पॉश कानून के तहत गठित समिति की कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया था।
आयोग ने कहा था कि शिकायत दर्ज होने और जांच शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से कार्रवाई की स्थिति पर सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। अब विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार, जांच के बाद प्रोफेसर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
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