प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा पर चर्चा में कहा: नेतृत्व केवल चुनाव लड़ना नहीं, लोगों को समझना है
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेतृत्व चुनाव या भाषण से नहीं, बल्कि लोगों से संवाद और उन्हें समझने की क्षमता से तय होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को जारी हुए वार्षिक कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ के दूसरे एपिसोड में छात्रों से बातचीत करते हुए कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल चुनाव लड़ना, भाषण देना या राजनीतिक दल बनाना नहीं है, बल्कि लोगों से संवाद करना और उन्हें समझना है।
कार्यक्रम में मोदी छात्रों से तामिलनाडु के कोयंबटूर, गुजरात के देव मोगरा, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े। रायपुर के एक छात्र द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, "जब काम करना हो, तो आपको यह तय करना चाहिए कि चाहे कोई और उस पर कार्रवाई करे या नहीं, आप स्वयं उसे करें। स्वयं से शुरू करें और नेतृत्व अपने आप आएगा। एक नेता बनने का मतलब चुनाव लड़ना, राजनीतिक दल बनाना या भाषण देना नहीं है। एक नेता की सबसे महत्वपूर्ण क्षमता यह है कि वह जो संचार कर रहा है, लोगों को समझा सके। इसे उन पर थोपना नहीं है, बल्कि उन्हें समझने में मदद करना है। इसके लिए आपको यह समझना होगा कि आप जिन लोगों से संवाद कर रहे हैं, वे क्या समझते हैं और उन्हें किस तरह से समझाया जा सकता है।"
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर छात्रों को यह संदेश भी दिया कि नेतृत्व की शुरुआत हमेशा खुद से होती है और जो लोग दूसरों को प्रेरित करना चाहते हैं, उन्हें पहले स्वयं अनुशासित और जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व हमेशा संवाद, समझ और लोगों की भावनाओं का सम्मान करने में निहित है।
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