×
 

23वीं फांसी की सजा सुनाने वाले जज की कड़ी टिप्पणी, बोले- कायर कहलाने से बेहतर मौत को गले लगाना

मुजफ्फरनगर के जज रवि कुमार दिवाकर ने दहेज हत्या मामले में मृत्युदंड सुनाते हुए कहा कि वह अपराधियों से डरकर कायर कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे।

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने दहेज हत्या के एक मामले में मृत्युदंड सुनाते हुए माफियाओं, गैंगस्टरों और अपराधियों को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। पिछले चार महीनों में यह उनके द्वारा सुनाई गई 23वीं मृत्युदंड की सजा है।

सोमवार को दहेज की मांग को लेकर पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी नदीम को मौत की सजा सुनाते हुए न्यायाधीश दिवाकर ने कहा कि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करते समय किसी बाहुबली, माफिया, गैंगस्टर या अपराधी के दबाव में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें केवल ईश्वर से डरना सिखाया है।

न्यायाधीश ने कहा कि यदि न्यायिक अधिकारी अपराधियों के डर से अपने कर्तव्यों से पीछे हटने लगें तो न्यायपालिका में जनता का विश्वास खत्म हो जाएगा। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि वह ‘कायर जज’ कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे और जब तक अपने सिद्धांतों पर कायम रह सकते हैं, तब तक सेवा करते रहेंगे।

और पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के बजाय मौत की सजा देने के वैकल्पिक तरीके की याचिका खारिज की

दिवाकर ने यह भी दावा किया कि उन्हें माफियाओं और अपराधियों की ओर से धमकियां मिल रही हैं। उनका आरोप है कि अपराधियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उनकी अदालत से करीब 100 गंभीर मामले वापस लेकर दूसरी अदालत में स्थानांतरित किए गए हैं। उन्होंने सुरक्षा कम किए जाने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा की मांग भी की है।

मामले में शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, अदालत ने नदीम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 504 के तहत दोषी ठहराया और उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। मामला 23 जुलाई 2018 का है, जब शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर नदीम ने अपनी 23 वर्षीय पत्नी शहजादी को जला दिया था। गंभीर हालत में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

मृत्यु से पहले शहजादी के दर्ज बयान को अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। मुकदमे के दौरान अभियोजन के सभी 11 गवाह मुकर गए, लेकिन मृत्युपूर्व बयान के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

और पढ़ें: बिना ओटीपी और लिंक क्लिक किए कारोबारी के खाते से छह लाख रुपये गायब, दुर्गापुर में साइबर ठगी से हड़कंप

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share