NDA की नजर बड़े विधेयकों पर, नए राजनीतिक समीकरणों से मिल सकता है दो-तिहाई बहुमत का रास्ता
एनडीए सरकार संविधान संशोधन, महिला आरक्षण और यूसीसी विधेयक पारित कराने की तैयारी में है। बदलते राजनीतिक समीकरण और संभावित नए समर्थन से बहुमत का गणित मजबूत हो सकता है।
केंद्र की एनडीए सरकार इस समय कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है। इनमें संविधान संशोधन विधेयक, महिला आरक्षण विधेयक और समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक प्रमुख माने जा रहे हैं। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को संसद में पर्याप्त समर्थन की आवश्यकता होगी, इसलिए उसकी नजर उन सांसदों पर है जो भविष्य में समर्थन दे सकते हैं।
हाल के दिनों में देश की राजनीति में तेजी से बदलाव देखने को मिले हैं। दावा किया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 सांसदों ने अलग राजनीतिक राह चुन ली है और वे भविष्य में एनडीए का समर्थन कर सकते हैं। इसके अलावा शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के कुछ सांसदों के भी बगावती रुख अपनाने की चर्चाएं हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में आए बदलावों के बाद द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि कुछ मुद्दों पर डीएमके संसद में एनडीए का समर्थन कर सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
और पढ़ें: क्या है चीन की पिंगलू नहर? 10 अरब डॉलर की परियोजना से बढ़ी सिंगापुर, अमेरिका और भारत की चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार आगामी मानसून सत्र में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक, महिला आरक्षण और यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। अप्रैल में पर्याप्त समर्थन न होने के कारण इन प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था।
इसी बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के कुछ सांसद भी एनडीए के साथ आ सकते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि समाजवादी पार्टी (सपा) में टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यदि विभिन्न दलों के कुछ सांसद एनडीए का समर्थन करते हैं, तो सरकार लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच सकती है, जिससे लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का रास्ता आसान हो सकता है।