भूकंप नहीं, ग्लेशियर ढहने से आई नेपाल में विनाशकारी बाढ़; 160 से अधिक लोगों की मौत
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ भूकंप से नहीं, बल्कि ग्लेशियर ढहने और मलबे के बहाव से आई। आपदा में 160 से अधिक लोगों की मौत हुई, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं।
नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे भूकंप नहीं, बल्कि ग्लेशियर के ढहने और मलबे के तेज बहाव को कारण बताया गया है। इस प्राकृतिक आपदा में 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने गुरुवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि शुरुआती रिपोर्टों में जिस भूकंप को बाढ़ का संभावित कारण माना जा रहा था, वह वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव की घटना थी।
यूएसजीएस के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 8:37 बजे 5.2 तीव्रता की भूकंपीय घटना दर्ज की गई थी। इसे शुरुआत में 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था। हालांकि, आसपास के भूकंपीय केंद्रों से मिले आंकड़ों, लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों और उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के बाद पुष्टि हुई कि वहां भूकंप नहीं आया था। ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव से नीचे की ओर अचानक विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बनी।
हिमालयी क्षेत्र में स्थित नेपाल ग्लेशियर झीलों के अचानक फटने वाली बाढ़ यानी जीएलओएफ के लिहाज से संवेदनशील है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पीछे हटने और पर्माफ्रॉस्ट में कमी जैसी जलवायु परिवर्तन से जुड़ी परिस्थितियां भूस्खलन और ग्लेशियर झीलों के फटने का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
और पढ़ें: नेपाल ने भूटान की भूकंप तैयारियों को मजबूत करने में की मदद, मोदी समर्थित गठबंधन का मिला सहयोग
आपदा के बाद प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए अधिकारियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बाढ़ में 19 मोटर योग्य पुल बह गए हैं। नेपाल सेना के 44 जवानों समेत करीब 80 सुरक्षाकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाओं और नुवाकोट तथा रसुवा जिलों में निर्माणाधीन पांच परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
और पढ़ें: नेपाल में हिंसा के बाद कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट