तीन देशों की यात्रा पूरी कर स्वदेश रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी, भारत-न्यूज़ीलैंड संबंध बने रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ीलैंड दौरा पूरा कर भारत के लिए प्रस्थान किया। दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देते हुए व्यापार और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़ीलैंड की दो दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार को भारत के लिए प्रस्थान किया। न्यूज़ीलैंड उनकी तीन देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव था। इस दौरे के दौरान उन्होंने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड का दौरा किया। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार करना था।
ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफ़र लक्सन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) के स्तर तक पहुंचाने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
वार्ता के बाद भारत और न्यूज़ीलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय वस्तु एवं सेवा व्यापार को बढ़ाकर 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया। दोनों नेताओं की बातचीत के दौरान 18 महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए, जिनमें 10 समझौतों पर हस्ताक्षर भी शामिल रहे।
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इन समझौतों में अगले चार वर्षों के लिए सहयोग का रोडमैप, हिंद-प्रशांत समुद्री सहयोग को मजबूत करने का ढांचा तथा भारतीय नौसेना और न्यूज़ीलैंड रक्षा बल के बीच पारस्परिक लॉजिस्टिक सहायता समझौता प्रमुख रहे।
ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य की चर्चा की। उन्होंने कहा कि ‘वाका’ केवल एक नाव नहीं, बल्कि साझा यात्रा और साझेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत और न्यूज़ीलैंड का ‘वाका’ अब नई यात्रा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है और दोनों देशों के सामने अवसरों का विशाल समुद्र मौजूद है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा हाल ही में हुए भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद हुआ, जिसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस यात्रा से व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, निवेश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।
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