प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेशेल्स दौरे से फिर चर्चा में भारत का महासागर विजन, जानिए क्या है इसकी खासियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेशेल्स दौरे के दौरान भारत के ‘महासागर’ विजन पर जोर रहेगा। यह पहल हिंद महासागर में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सतत विकास को बढ़ावा देती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय सेशेल्स दौरे के साथ भारत का ‘महासागर’ (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन – MAHASAGAR) विजन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी भाग लेंगे। मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करेगी तथा सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देगी।
महासागर विजन भारत की वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के लिए व्यापक समुद्री और रणनीतिक नीति है। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, सतत विकास, जलवायु लचीलापन, क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है। इस पहल के माध्यम से भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा साझेदार और संकट की स्थिति में सबसे पहले सहायता पहुंचाने वाले देश के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
यह पहल अफ्रीकी देशों और हिंद महासागर क्षेत्र के साझेदार देशों में ब्लू इकोनॉमी, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री अवसंरचना और क्षेत्रीय संपर्क को भी बढ़ावा देती है। इसका लक्ष्य साझा समृद्धि, समुद्री संसाधनों के संरक्षण और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है।
भारत और सेशेल्स के संबंध 1770 के दशक से जुड़े हुए हैं। वर्ष 1976 में सेशेल्स की स्वतंत्रता के बाद भारत उन पहले देशों में शामिल था, जिन्होंने उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हुआ है। भारत ने सेशेल्स रक्षा बलों को सैन्य प्रशिक्षण, नौसैनिक और हवाई संसाधन, परिवहन प्लेटफॉर्म तथा क्षमता निर्माण में निरंतर सहयोग प्रदान किया है। हाल ही में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा और डिजिटल परिवर्तन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।