लोकमान्य तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, राष्ट्रभक्ति के योगदान को किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमान्य तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके राष्ट्रवाद, साहस और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को प्रेरणादायी बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों महान विभूतियों का राष्ट्रभक्ति, त्याग और स्वतंत्रता संग्राम में दिया गया योगदान देशवासियों को आज भी प्रेरित करता है तथा उनका आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा।
23 जुलाई 1856 को जन्मे बाल गंगाधर तिलक, जिन्हें देशभर में लोकमान्य तिलक के नाम से जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख राष्ट्रवादी नेताओं में शामिल थे। वे प्रसिद्ध लाल-बाल-पाल तिकड़ी के महत्वपूर्ण सदस्य थे। उन्होंने स्वराज की अवधारणा को जन-जन तक पहुंचाने, ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनमत तैयार करने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उनके विचारों और लेखनी ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि लोकमान्य तिलक भारत के स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे महानायक थे जिन्होंने देश में राष्ट्रवाद की भावना को नई ऊर्जा दी और असंख्य लोगों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए तिलक के प्रयास आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनके लेखन ने भारतीयों में आत्मविश्वास और राष्ट्रीय गौरव की भावना का संचार किया।
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इसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें अदम्य साहस, अटूट देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आजाद ने अपने साहस और दृढ़ संकल्प से भारतीय युवाओं में देश के लिए समर्पण की भावना जगाई। उनका जीवन स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है और उनका संघर्ष आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
23 जुलाई 1906 को जन्मे चंद्रशेखर आजाद भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। राम प्रसाद बिस्मिल के बलिदान के बाद उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) का पुनर्गठन किया और उसका नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचएसआरए) रखा। उनके नेतृत्व में क्रांतिकारी आंदोलन को नई शक्ति मिली और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और तेज हुआ।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी लोकमान्य तिलक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन स्वराज, स्वदेशी, भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने तिलक के प्रसिद्ध नारे "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" का उल्लेख करते हुए कहा कि इस उद्घोष ने पूरे देश में स्वतंत्रता की चेतना का संचार किया और जन-जन में आजादी की अलख जगाई।
अमित शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती जैसे आयोजनों के माध्यम से राष्ट्रीय जागरण को नई दिशा दी। उन्होंने यह भी कहा कि तिलक की प्रसिद्ध कृति 'गीता रहस्य' आज भी लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति अडिग रहने और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
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