पीएसएलवी के तीसरे चरण में आई तकनीकी गड़बड़ी, इसरो कर रहा है डेटा का विश्लेषण
पीएसएलवी-सी62 मिशन के तीसरे चरण में तकनीकी विचलन देखा गया। इसरो डेटा का विश्लेषण कर रहा है और मिशन की स्थिति पर जल्द जानकारी देने की बात कही है।
भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के 64वें मिशन के दौरान सोमवार को तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पुष्टि की कि प्रक्षेपण के बाद रॉकेट के तीसरे चरण में एक विचलन (एनॉमली) देखा गया है। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि मिशन से जुड़े सभी आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। हालांकि, उन्होंने फिलहाल मिशन को न तो सफल और न ही असफल घोषित किया है।
पीएसएलवी-सी62 / ईओएस-एन1 मिशन ने सोमवार सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। यह मिशन पीएसएलवी के लिए बेहद अहम माना जा रहा था, क्योंकि 2025 में इस प्रक्षेपण यान को एक विफलता का सामना करना पड़ा था।
इस मिशन के तहत पीएसएलवी-सी62 कुल 15 उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ था। इनमें प्रमुख पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-एन1 के अलावा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित निगरानी उपग्रह ‘अन्वेषा’ भी शामिल था। योजना के अनुसार, ईओएस-एन1 और इसके साथ 14 सह-यात्री उपग्रहों को सूर्य समकालिक कक्षा (सन सिंक्रोनस ऑर्बिट) में स्थापित किया जाना था, जबकि ‘केस्ट्रेल इनिशियल डिमॉन्स्ट्रेटर’ (केआईडी) उपग्रह को पुनःप्रवेश पथ पर भेजा जाना था।
और पढ़ें: भारत में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज: पीएम मोदी संग अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हुए शामिल
अन्वेषा उपग्रह को उन्नत इमेजिंग क्षमताओं के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे भारत की रणनीतिक क्षेत्रों की निगरानी और सटीक मानचित्रण क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। पहली बार किसी एक भारतीय निजी कंपनी—हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस—ने पीएसएलवी मिशन में सात उपग्रहों का योगदान दिया। यह भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।