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राजस्थान के सरकारी रिकॉर्ड से हटेगा दलित शब्द, अब इस्तेमाल होगा अनुसूचित जाति

राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों में ‘दलित’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। अब इसकी जगह संवैधानिक शब्द ‘अनुसूचित जाति’ और ‘Scheduled Caste’ लिखा जाएगा।

राजस्थान में सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड में अब दलित’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी कर सरकारी कामकाज में इस शब्द के प्रयोग को बंद करने के निर्देश दिए हैं। अब इसकी जगह केवल संवैधानिक शब्द अनुसूचित जाति’ और अंग्रेजी में ‘Scheduled Caste’ का इस्तेमाल किया जाएगा।

2 जुलाई 2026 को राजस्थान पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में राज्य के सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज आईजी, जिला पुलिस अधीक्षकों और डीसीपी को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी फाइलों, प्रमाणपत्रों, कार्यालयीन पत्राचार, अभिलेखों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में केवल संविधान में मान्यता प्राप्त शब्दावली का ही प्रयोग किया जाए।

यह आदेश अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (विविध प्रकोष्ठ एवं एससी) और सिविल राइट्स शाखा की ओर से जारी किया गया है। हालांकि, यह निर्देश पूरी तरह नया नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि केंद्र सरकार के पुराने आदेशों से जुड़ी हुई है।

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 15 मार्च 2018 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि अनुसूचित जाति के लिए सरकारी दस्तावेजों में केवल ‘अनुसूचित जाति’ या ‘Scheduled Caste’ शब्द का ही उपयोग किया जाए। इससे पहले 1982 में गृह मंत्रालय, 1990 में तत्कालीन कल्याण मंत्रालय और 2012 में सामाजिक न्याय मंत्रालय भी इसी तरह के निर्देश जारी कर चुके थे।

इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने भी वर्ष 2018 में टिप्पणी की थी कि संविधान या किसी कानून में ‘दलित’ शब्द का उल्लेख नहीं है। अदालत ने सरकारी कामकाज में संवैधानिक शब्दावली अपनाने की सलाह दी थी।

राजस्थान में भी इससे पहले वर्ष 2019 में भीलवाड़ा के सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय ने मीडिया संस्थानों से सरकारी निर्देशों का हवाला देते हुए ‘दलित’ शब्द के इस्तेमाल से बचने का अनुरोध किया था।

अब सरकारी एफआईआर, चार्जशीट, प्रमाणपत्र, आदेश और रिकॉर्ड में ‘दलित’ की जगह ‘अनुसूचित जाति’ लिखा जाएगा। हालांकि, यह आदेश मुख्य रूप से सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक कामकाज तक सीमित है। आम बोलचाल, मीडिया और राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर अभी कोई अलग प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। इस फैसले के बाद सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।

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