ज़हर देकर हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, ट्रायल छह महीने में पूरा करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने ज़हर देकर हत्या मामले की सुनवाई तेज़ करने का आदेश दिया है। ट्रायल छह महीने में पूरा होगा, देरी होने पर आरोपी दोबारा जमानत मांग सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ज़हर देकर हत्या के एक सनसनीखेज मामले में तेज़ी दिखाते हुए ट्रायल को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने मुंबई की ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि वह इस मामले की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करे। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा है कि यदि तय समय में ट्रायल पूरा नहीं होता है, तो आरोपी दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यह मामला वर्ष 2022 का है, जब मुंबई पुलिस ने कविता शाह और उनके कथित साथी हितेश जैन के खिलाफ संताक्रूज़ निवासी व्यवसायी कमलकांत शाह की हत्या का मामला दर्ज किया था। आरोप है कि कविता शाह ने अपने पति की हत्या के लिए भोजन में आर्सेनिक और थैलियम जैसे जहरीले पदार्थ मिलाए, जिसमें हितेश जैन ने उनका साथ दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर 2025 को पारित अपने आदेश में यह उल्लेख किया कि अब तक चार गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से एक का बयान पिछले सप्ताह ही लिया गया। अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मामले की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो और पीड़ित पक्ष के साथ-साथ आरोपियों को भी समयबद्ध न्याय मिल सके।
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कविता शाह को सितंबर 2024 में जमानत मिल चुकी है, जबकि सह-आरोपी हितेश जैन अब भी न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि ट्रायल तय समयसीमा में पूरा नहीं होता है, तो जैन जमानत के लिए पुनः आवेदन कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न केवल इस मामले में बल्कि अन्य लंबित आपराधिक मामलों में भी समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे निचली अदालतों पर दबाव बढ़ेगा कि वे गंभीर अपराधों की सुनवाई में तेजी लाएं और न्याय प्रक्रिया को लंबा खींचने से बचें।
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