तेलंगाना की जेलों में भीड़ राष्ट्रीय औसत से कम, एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा
एनसीआरबी की नई रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना की जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से कम है, जबकि देश के कई राज्यों की जेलें अब भी अत्यधिक भीड़भाड़ का सामना कर रही हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी “प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया 2024” रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि तेलंगाना की जेलों में भीड़भाड़ राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 तक तेलंगाना की जेलों में कैदियों की औसत क्षमता उपयोग दर 84.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जो राष्ट्रीय औसत 112.7 प्रतिशत से काफी नीचे है।
रिपोर्ट में बताया गया कि देश के कई बड़े राज्यों की जेलें गंभीर भीड़भाड़ की समस्या से जूझ रही हैं। राजधानी दिल्ली में जेलों की क्षमता से लगभग दोगुने कैदी बंद हैं और वहां ऑक्यूपेंसी रेट 194.6 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा मेघालय में 163.5 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 147.1 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 143.9 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी दर्ज हुई।
दक्षिण भारत के राज्यों की बात करें तो आंध्र प्रदेश की जेलों में 90.8 प्रतिशत और तमिलनाडु में 83.2 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी रेट दर्ज किया गया। इस तुलना में तेलंगाना की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि कम भीड़भाड़ वाली जेलों में कैदियों के पुनर्वास, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है। वहीं, अत्यधिक भीड़भाड़ वाली जेलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
एनसीआरबी की यह रिपोर्ट देश की जेल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को सामने लाती है और यह संकेत देती है कि कई राज्यों को अपनी जेल क्षमता बढ़ाने और सुधारात्मक व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के बाद जेल सुधार और कैदियों के अधिकारों को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
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