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संभावित दल-बदल से चिंतित उद्धव सेना, लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र; शिवसेना (यूबीटी) को ही मान्यता देने की मांग

संभावित दल-बदल की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष से केवल अपनी पार्टी को मान्यता देने की मांग की है। सात सांसदों के शिंदे गुट में जाने की चर्चा तेज है।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। संभावित दल-बदल की अटकलों के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में केवल शिवसेना (यूबीटी) को ही अधिकृत राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देने की मांग की है।

पार्टी के सांसद और संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत द्वारा भेजे गए इस पत्र में आग्रह किया गया है कि शिवसेना (यूबीटी) से जुड़ा होने का दावा करने वाले किसी भी अलग गुट, बागी समूह या स्वतंत्र समूह को अलग पहचान, दर्जा, सुविधाएं, विशेषाधिकार या मान्यता न दी जाए। पार्टी ने यह भी कहा है कि यदि कोई अन्य गुट मान्यता या विशेष दर्जे की मांग लेकर लोकसभा अध्यक्ष के पास पहुंचता है, तो शिवसेना (यूबीटी) को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पार्टी संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का सहारा लेने का अधिकार सुरक्षित रखती है। यह अनुसूची दल-बदल विरोधी कानून से संबंधित है।

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इस घटनाक्रम के पीछे सात सांसदों के संभावित रूप से एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चाएं बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, ये सांसद जल्द ही दिल्ली में शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के आवास पर बैठक कर सकते हैं और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी शामिल होने की संभावना है।

शिंदे गुट में जाने की चर्चा जिन नेताओं को लेकर है, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव के नाम शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि ये सांसद पहले एक अलग गुट बना सकते हैं और बाद में आधिकारिक रूप से शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय कर सकते हैं।

यह राजनीतिक घटनाक्रम 19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस के आसपास होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो इससे एकनाथ शिंदे की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है तथा महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इसी बीच खबरें हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ विधायक भी प्रतिद्वंद्वी खेमे के संपर्क में हैं। इस राजनीतिक अभियान को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया गया है। संभावित टूट-फूट की आशंकाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने 22 जून को मुंबई स्थित पार्टी कार्यालय ‘शिवालय’ में सभी विधायकों की बैठक बुलाई है।

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