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येरुशलम में संयुक्त राष्ट्र स्थल ध्वस्त करने पर ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा सहित कई देशों ने इज़रायल की निंदा की

येरुशलम में यूएनआरडब्ल्यूए परिसर ध्वस्त करने पर ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा सहित कई देशों ने इज़रायल की निंदा की और सभी ध्वस्तीकरण रोकने की मांग की।

ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और कई अन्य देशों ने येरुशलम में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े एक स्थल को ध्वस्त किए जाने को लेकर इज़रायल की कड़ी निंदा की है। यह कार्रवाई पिछले सप्ताह इज़रायली अधिकारियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के पूर्वी येरुशलम स्थित परिसर को गिराए जाने के बाद सामने आई है।

बुधवार (28 जनवरी 2026) को जारी एक संयुक्त बयान में इन देशों ने इज़रायल सरकार से सभी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाइयों को तत्काल रोकने की अपील की। यह बयान ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया, जिसमें ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, आयरलैंड, जापान, नॉर्वे, पुर्तगाल और स्पेन के विदेश मंत्रियों की ओर से प्रतिक्रिया दर्ज की गई।

संयुक्त बयान में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र के किसी एजेंसी के खिलाफ किसी सदस्य देश द्वारा इस तरह की अभूतपूर्व कार्रवाई उसकी कार्यक्षमता को कमजोर करने का एक अस्वीकार्य प्रयास है। बयान में इज़रायल से अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने का आग्रह किया गया है, ताकि संयुक्त राष्ट्र परिसरों की सुरक्षा और उनकी अवध्यता सुनिश्चित की जा सके। इसमें 1946 के संयुक्त राष्ट्र सामान्य सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया कि यूएन परिसरों की रक्षा करना सभी सदस्य देशों की जिम्मेदारी है।

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बयान में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र का सदस्य होने के नाते इज़रायल को सभी ध्वस्तीकरण कार्यों को रोकना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए।

वहीं, इज़रायल के विदेश मंत्रालय ने 20 जनवरी 2025 को कहा था कि यह ध्वस्तीकरण एक नए कानून के तहत किया गया है, जिसमें यूएनआरडब्ल्यूए पर प्रतिबंध लगाया गया है। इज़रायल ने संगठन पर उग्रवादी समूहों और हमास से संबंध होने का आरोप लगाया है। हालांकि, कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इन आरोपों को लेकर चिंता जताई है और इसे मानवीय कार्यों में बाधा बताया है।

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