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भारतीय चुनावों में पैसे के बढ़ते प्रभाव पर ADR की चेतावनी, राजनीतिक फंडिंग व्यवस्था में बड़े सुधार की मांग

ADR की रिपोर्ट में भारतीय चुनावों में बढ़ते धनबल पर चिंता जताते हुए राजनीतिक दलों के लिए सख्त कानून, पारदर्शी फंडिंग, डिजिटल चंदा और चुनाव आयोग को अधिक अधिकार देने की मांग की गई।

भारतीय लोकतंत्र में बढ़ते धनबल के प्रभाव को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन की नई रिपोर्ट ‘पॉलिटिकल फाइनेंस इन इंडिया: असेसमेंट एंड रिकमेंडेशंस’ में कहा गया है कि चुनावों में अनियंत्रित पैसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रहा है और इसमें तत्काल सुधार की जरूरत है।

रिपोर्ट में सात प्रमुख खामियों की ओर ध्यान दिलाया गया है। इनमें चुनावों में धनबल और बाहुबल का बढ़ता प्रभाव, राजनीतिक दलों के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमी, चुनाव आयोग के नियमों को लागू कराने के लिए कानूनी शक्ति का अभाव, नियम तोड़ने वाले दलों का पंजीकरण रद्द न कर पाने की समस्या, सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून से बचने की प्रवृत्ति, उम्मीदवारों द्वारा नियमों का उल्लंघन और राजनीतिक सुधार के लिए इच्छाशक्ति की कमी शामिल हैं।

एडीआर ने सुझाव दिया है कि राजनीतिक दलों को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानून बनाया जाना चाहिए। इस कानून के तहत राजनीतिक दलों के लिए वित्तीय पारदर्शिता, आंतरिक लोकतंत्र और जवाबदेह नेतृत्व अनिवार्य किया जाए। साथ ही चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया जाए कि वह नियमों का पालन न करने वाले दलों का पंजीकरण रद्द कर सके।

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि उनकी गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ सके। इसके अलावा चुनावों में रिश्वत और मुफ्त उपहार देने की प्रथा को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत भ्रष्ट आचरण घोषित करने की मांग की गई है।

एडीआर ने राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निजी दान की सीमा तय करने, सभी दानदाताओं का पूरा खुलासा करने और नकद या गुमनाम चंदे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की है। सभी लेन-देन को डिजिटल माध्यम से करने का सुझाव दिया गया है।

इसके साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। रिपोर्ट में चुनाव खर्च की सख्त सीमा तय करने और चुनाव आयोग को अधिक शक्तियां देने की भी सिफारिश की गई है, ताकि चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जा सके।

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