चीन की दीवार नहीं, अफ्रीका बना रहा 8,000 किलोमीटर लंबी ग्रेट ग्रीन वॉल, जलवायु परिवर्तन से लड़ने की अनोखी पहल
अफ्रीका की 8,000 किलोमीटर लंबी ग्रेट ग्रीन वॉल परियोजना का लक्ष्य सहारा के विस्तार को रोकना, भूमि पुनर्जीवित करना, रोजगार बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है।
अफ्रीका इस समय दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी पर्यावरणीय परियोजनाओं में से एक 'ग्रेट ग्रीन वॉल' पर काम कर रहा है। करीब 8,000 किलोमीटर लंबी यह परियोजना सेनेगल के अटलांटिक तट से शुरू होकर जिबूती तक फैली हुई है। इसका उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित क्षेत्रों को दोबारा हरा-भरा और उपजाऊ बनाना है।
इस पहल की शुरुआत वर्ष 2007 में अफ्रीकी संघ ने की थी। शुरुआती योजना सहारा रेगिस्तान के दक्षिणी हिस्से में पेड़ों की लंबी पट्टी विकसित करने की थी ताकि रेगिस्तान का फैलाव रोका जा सके। हालांकि बाद में विशेषज्ञों ने रणनीति में बदलाव करते हुए पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जीवन पर जोर दिया।
अब इस परियोजना के तहत जंगलों, घास के मैदानों, कृषि भूमि, आर्द्रभूमि और स्थानीय वनस्पतियों को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। साहेल क्षेत्र, जो लंबे समय से सूखा, भूमि क्षरण और अनियमित वर्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, इस अभियान का प्रमुख केंद्र है।
वर्ष 2030 तक इस परियोजना के तहत 10 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने, वातावरण से 25 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने और करीब एक करोड़ हरित रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा और आजीविका को मजबूत बनाने की भी योजना है।
अब तक सेनेगल, इथियोपिया, नाइजीरिया और नाइजर सहित कई देशों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हालिया आकलन के अनुसार लगभग 3 करोड़ हेक्टेयर भूमि का पुनर्स्थापन किया जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कृषि उत्पादन, जल संरक्षण, जैव विविधता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यदि यह मॉडल पूरी तरह सफल होता है, तो दुनिया के अन्य शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए भी यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।