AI का बढ़ता असर: चार देशों में 20 प्रतिशत अपनाने से टेक सेक्टर में भर्ती पर दबाव
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, एआई अपनाने से टेक, कॉल सेंटर और सॉफ्टवेयर क्षेत्रों में भर्ती धीमी हुई है। जूनियर कर्मचारियों पर इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है।
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल का असर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार और भर्ती पर दिखाई देने लगा है। विकसित देशों में एआई अपनाने की दर करीब 15 से 20 प्रतिशत पहुंच गई है। फ्रांस, अमेरिका, नीदरलैंड्स और ब्रिटेन इस दायरे के ऊपरी स्तर पर हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, उभरते बाजारों में एआई अपनाने की दर अभी लगभग 10 से 15 प्रतिशत है। जनरेटिव एआई के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां उन क्षेत्रों में भर्ती योजनाओं की दोबारा समीक्षा कर रही हैं, जहां ऑटोमेशन का खतरा अधिक है।
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, 2022 की दूसरी छमाही से ऑटोमेशन के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में नौकरी के अवसरों की वृद्धि धीमी हुई है। इसका असर जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में विशेष रूप से देखा गया।
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सबसे ज्यादा प्रभाव सूचना एवं संचार सेवाओं, कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर प्रकाशन, कंसल्टिंग और विज्ञापन जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। अमेरिका में कॉल सेंटर रोजगार अपने दीर्घकालिक रुझान से 39 प्रतिशत नीचे है। कनाडा और जर्मनी में यह अंतर क्रमशः 33 और 27 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी क्षेत्र में भर्ती पर दबाव वैश्विक है, लेकिन अमेरिका में इसका असर अधिक स्पष्ट है। वहीं, कई अन्य विकसित देशों में समान क्षेत्रों का रोजगार ऐतिहासिक रुझानों के करीब बना हुआ है।
हालांकि, एआई का कुल रोजगार पर असर अभी सीमित बताया गया है। अमेरिका, फ्रांस और कनाडा में पेशेवरों के एआई एक्सपोजर में 10 प्रतिशत वृद्धि, सालाना रोजगार वृद्धि में लगभग 0.1 प्रतिशत अंक की कमी से जुड़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जूनियर कर्मचारियों पर जोखिम अधिक है, क्योंकि कंपनियां तेजी से स्वचालित समाधान अपना रही हैं।
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