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एआई कंटेंट लेबलिंग नियम अंतिम चरण में, जल्द होंगे लागू: आईटी सचिव एस. कृष्णन

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि एआई-जनित कंटेंट की लेबलिंग के नियम अंतिम चरण में हैं, जिससे डीपफेक और गलत सूचना पर लगाम लगेगी।

केंद्र सरकार द्वारा एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से तैयार किए गए कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य करने की योजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। आईटी सचिव एस. कृष्णन ने मंगलवार को कहा कि ये नियम उपयोगकर्ताओं को एआई-जनित सामग्री की पहचान करने और उसकी सत्यता परखने में सक्षम बनाएंगे, ताकि कृत्रिम कंटेंट को सच के रूप में पेश न किया जा सके।

आईटी सचिव ने बताया कि एआई लेबलिंग नियम दो प्रमुख श्रेणियों पर लागू होंगे। पहली, एआई टूल्स उपलब्ध कराने वाली कंपनियों पर, जैसे कि चैटजीपीटी, ग्रोक और जेमिनी। दूसरी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर, जिनमें फेसबुक और यूट्यूब जैसे बड़े डिजिटल मंच शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही मामलों में संबंधित कंपनियां बड़ी टेक फर्म्स हैं, जिनके पास ऐसे लेबलिंग सिस्टम लागू करने की तकनीकी क्षमता और समाधान मौजूद हैं।

नैसकॉम द्वारा आयोजित ‘बिल्डिंग सेफ स्पेसेज़ फॉर एआई इम्पैक्ट: रेगुलेटरी एंड प्राइवेट सैंडबॉक्सेज़’ कार्यक्रम में बोलते हुए कृष्णन ने कहा, “किसी कंटेंट को एआई-जनित के रूप में लेबल करना लोगों को उसे जांचने का अवसर देता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कंटेंट एआई द्वारा बनाया गया है और इसे सच के रूप में पेश नहीं किया जा रहा।”

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उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट नियम फिलहाल कानूनी जांच की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और जल्द ही अंतिम रूप ले लिया जाएगा। गौरतलब है कि अक्टूबर में सरकार ने आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा था, जिसमें एआई-जनित कंटेंट की स्पष्ट पहचान और बड़े प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने की बात कही गई थी। इसका उद्देश्य डीपफेक, फर्जी वीडियो, ऑडियो और अन्य सिंथेटिक मीडिया से होने वाले नुकसान को रोकना है।

आईटी मंत्रालय ने पहले कहा था कि जनरेटिव एआई की मदद से तैयार की गई भ्रामक सामग्री का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, चुनावों को प्रभावित करने और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। प्रस्तावित नियमों में एआई कंटेंट पर स्पष्ट निशान, पहचानकर्ता और मेटाडेटा जोड़ने की बात शामिल है, ताकि इसे वास्तविक मीडिया से अलग पहचाना जा सके।

एआई पर अलग कानून की जरूरत के सवाल पर कृष्णन ने कहा कि फिलहाल सरकार इसे खारिज नहीं कर रही है, लेकिन अभी मौजूदा कानून पर्याप्त हैं। भविष्य में जरूरत पड़ी तो नया एआई कानून लाया जा सकता है।

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