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बिम्सटेक बैठक में अजीत डोभाल ने रखा भारत का सुरक्षा विजन, नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट नीति पर दिया जोर

बिम्सटेक बैठक में अजीत डोभाल ने क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग पर जोर देते हुए भारत की नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और महासागर विजन की प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) की बैठक में सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी समन्वय पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

अपने संबोधन में अजीत डोभाल ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा, बेहतर कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण और आर्थिक सुरक्षा जैसे बिम्सटेक के मूल उद्देश्य सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को नई मजबूती प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, बिम्सटेक केवल एक क्षेत्रीय संगठन नहीं, बल्कि साझा विकास, स्थिरता और पारस्परिक विश्वास का प्रभावी मंच है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए बिम्सटेक का विशेष महत्व है क्योंकि यह देश की प्रमुख विदेश नीति पहलों से सीधे जुड़ा हुआ है। डोभाल ने स्पष्ट किया कि यह संगठन भारत की नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को मजबूत करता है, जिसके तहत पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि बिम्सटेक भारत की एक्ट ईस्ट’ नीति का भी महत्वपूर्ण आधार है, जिसका उद्देश्य दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

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अजीत डोभाल ने भारत के महासागर (एमएएचएएसएजीएआर)’ विजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण क्षेत्र के सभी देशों के लिए सुरक्षा और समावेशी विकास सुनिश्चित करने पर आधारित है। इसके माध्यम से समुद्री सुरक्षा, व्यापार, आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है ताकि सभी सदस्य देशों को समान रूप से लाभ मिल सके।

उन्होंने सदस्य देशों से आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। डोभाल ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से न केवल क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत होगी, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि बिम्सटेक के साझा लक्ष्य और सदस्य देशों की एकजुटता पूरे क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, समृद्ध और बेहतर रूप से जुड़ा हुआ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने दोहराया कि भारत इस दिशा में सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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