राम मंदिर दान चोरी केस में बड़ा विवाद, अयोध्या बार का फैसला—आरोपियों की पैरवी पर ₹5 लाख जुर्माना
राम मंदिर दान चोरी मामले में अयोध्या बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी पर रोक लगाई और ₹5 लाख जुर्माना तय किया। पुलिस जांच और छापेमारी जारी है।
राम मंदिर दान चोरी मामले में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित फैजाबाद बार एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की ओर से कोई भी वकील पैरवी नहीं करेगा। साथ ही, इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले वकीलों पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
यह निर्णय सोमवार को आयोजित बार एसोसिएशन की आम सभा में लिया गया, जहां सदस्यों ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर गहरी नाराजगी जताई। बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए यह फैसला लिया गया है कि कोई भी वकील आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा।
बैठक में कुछ वकीलों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर भी कार्रवाई की मांग की। हालांकि ये तीनों एफआईआर में आरोपी नहीं हैं, लेकिन वकीलों ने उन्हें तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने की चेतावनी दी है, अन्यथा आंदोलन और शहर बंद करने की बात कही गई है।
इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपी—अविनाश शुक्ला, अनुपकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव—इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। आरोप है कि ये सभी राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े थे और धन के गबन में शामिल पाए गए हैं।
पुलिस ने रविवार को सभी आरोपियों के घरों पर छापेमारी की और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान कई अहम सबूत जुटाए गए हैं।
जांच के तहत पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का बयान पहले ही दर्ज किया जा चुका है। पुलिस अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज कर सकती है।
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