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बालेन शाह का चार साल में राजनीति में उफान: नेपाल में पुराने नेताओं की असफलता और भारत-नेपाल रिश्ते मजबूत क्यों?

नेपाल में बालेन शाह की तेज़ उन्नति के पीछे जन-गुस्सा, भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध और सोशल मीडिया का असर है। भारत-नेपाल रिश्ते में युवा नेतृत्व की नई दिशा बन सकती है।

नेपाल की राजनीतिक स्थिति में ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है। पारंपरिक राजनीतिक दलों और वामपंथी ताकतों के स्थान पर अब युवा नेता बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेतृत्व में नई राजनीति आकार ले रही है। काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले बालेन शाह ने नेपाल के आम चुनावों में भारी जीत हासिल की है।

नेपाल में पिछले 17 सालों में 14 सरकारें बनीं, जिनमें से कोई भी अपनी पूरी मियाद पूरी नहीं कर पाई। इसके परिणामस्वरूप जनरल जेड के विरोध और भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्से ने नेपाल में सरकारों के खिलाफ व्यापक एंटी-इंकंबेंसी का माहौल बना दिया। इस माहौल में बालेन शाह का उभरना एक तेज़ प्रक्रिया थी।

दक्षिण एशिया विशेषज्ञ, ने कहा कि बालेन शाह का उभार वैश्विक राजनीति के बदलावों से मेल खाता है, जहां तकनीकी (विशेष रूप से सोशल मीडिया) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। बालेन शाह ने 2013 में रैप संगीत के जरिए सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और उसी प्रकार उन्होंने काठमांडू में मेयर का चुनाव जीतने के बाद जनता का दिल जीता।

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जबकि कुछ पुराने नेता भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंधों की वजह से असफल हो गए, बालेन शाह की नई राजनीति में उम्मीदें जागी हैं। भारत-नेपाल रिश्तों पर डॉ. पाठक ने कहा कि रिमिटेंस और हाइड्रोपावर के मामलों में भारत की भूमिका अहम बनी रहेगी, और युवा नेतृत्व नेपाल को भारत से जोड़े रखेगा।

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