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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा, खराब स्वास्थ्य को बताया कारण

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल 2028 तक था, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत अपना इस्तीफा संसद के अध्यक्ष को सौंपा। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन का कार्यकाल वर्ष 2028 में समाप्त होना था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ने का फैसला किया।

राष्ट्रपति ने बंगाली भाषा में लिखे अपने इस्तीफा पत्र में खराब स्वास्थ्य को इसका प्रमुख कारण बताया। 76 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन ने बंगभवन के आधिकारिक लेटरहेड पर लिखे पत्र में कहा कि वह लंबे समय से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उन्हें हृदय संबंधी परेशानी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गुर्दे से जुड़ी समस्याएं, पहले हुई बाईपास सर्जरी और हाल ही में ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी का पता चला है। इस बीमारी के कारण उन्हें कई बार बेहोशी के दौरे भी पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले इलाज के कारण राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए कठिन हो गया है।

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अपने इस्तीफा पत्र में शहाबुद्दीन ने अगस्त 2024 के राजनीतिक संकट के बाद देश को संवैधानिक व्यवस्था में बनाए रखने में अपने योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस कठिन दौर में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया।

अब राष्ट्रपति का इस्तीफा संसद अध्यक्ष हाफिजुद्दीन अहमद को सौंपा जाएगा। बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, नए राष्ट्रपति के चुनाव तक संसद अध्यक्ष कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाएंगे। हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार किया है।

रिपोर्टों के अनुसार, शहाबुद्दीन का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब यह चर्चा चल रही थी कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार देश के औपचारिक प्रमुख के साथ सहज नहीं थे।

मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। वह 1971 के मुक्ति संग्राम के पूर्व सैनिक और पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं। जुलाई-अगस्त 2024 में छात्र आंदोलनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई थी और शेख हसीना भारत आ गई थीं।

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