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बांग्लादेश चुनाव से पहले दुष्प्रचार की बाढ़ को लेकर चेतावनी, यूनुस ने जताई चिंता

अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश चुनाव से पहले दुष्प्रचार की बाढ़ की चेतावनी दी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से 12 फरवरी के मतदान को प्रभावित करने वाली फर्जी सूचनाओं से निपटने की मांग की।

बांग्लादेश के अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को चेतावनी दी कि देश में आगामी चुनावों से पहले दुष्प्रचार की तेज़ लहर देखने को मिल रही है, जो अगले महीने होने वाले अहम मतदान को प्रभावित कर सकती है। यह चुनाव वर्ष 2024 में हुए जनआंदोलन के बाद पहला आम चुनाव होगा, जिसमें सरकार का तख्तापलट हो गया था।

85 वर्षीय नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने कहा कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार टीम से 12 फरवरी को होने वाले चुनावों को निशाना बना रहे दुष्प्रचार के खिलाफ कदम उठाने का आग्रह किया है। उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यूनुस ने यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क के साथ टेलीफोन पर बातचीत में उठाया।

बयान के अनुसार, यूनुस ने कहा, “चुनावों को लेकर दुष्प्रचार की बाढ़ आ गई है। यह विदेशी मीडिया और स्थानीय स्रोतों, दोनों से फैलाया जा रहा है।” उन्होंने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें, अफवाहें और अटकलें फैलाई जा रही हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

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बांग्लादेश अगस्त 2024 से राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है, जब छात्रों के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की 15 साल की सत्तावादी सरकार गिर गई थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों के अनुरोध पर यूनुस निर्वासन से लौटे और अंतरिम सरकार में “मुख्य सलाहकार” की भूमिका संभाली।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने, बांग्लादेशी प्रेस बयान के अनुसार, इस चुनौती से निपटने में संयुक्त राष्ट्र के समर्थन का आश्वासन दिया है। यूरोपीय संघ के चुनाव पर्यवेक्षकों का कहना है कि 17 करोड़ आबादी वाले इस मुस्लिम बहुल देश में होने वाला यह मतदान वर्ष 2026 की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया होगी।

यूनुस ने कहा कि उन्हें एक “पूरी तरह से टूटी हुई” राजनीतिक व्यवस्था विरासत में मिली है। उन्होंने एक सुधार चार्टर का समर्थन किया है, जिसे वह सत्तावादी शासन की वापसी रोकने के लिए आवश्यक मानते हैं। इन प्रस्तावित सुधारों पर उसी दिन जनमत संग्रह भी होगा, जिससे कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के बीच संतुलन मजबूत करने का दावा किया गया है।

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