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आज भारत बंद: श्रम कानूनों और भारत-अमेरिका समझौते के विरोध में देशव्यापी हड़ताल

ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर आज भारत बंद है। श्रम कानूनों और अन्य नीतियों के विरोध में 30 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी की संभावना है।

आज भारत में कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा देशव्यापी हड़ताल यानी भारत बंद का आह्वान किया गया है। इस विरोध प्रदर्शन से देश के कई राज्यों में बैंकिंग, परिवहन और सरकारी सेवाओं सहित प्रमुख सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना है। यूनियन नेताओं का कहना है कि इस हड़ताल में 30 करोड़ से अधिक मजदूर शामिल हो सकते हैं।

दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने पुष्टि की है कि यह बंद तय कार्यक्रम के अनुसार होगा। कई क्षेत्रों में पहले ही हड़ताल की नोटिस जारी की जा चुकी है और आयोजकों का दावा है कि पूरी तैयारी कर ली गई है। यूनियनों ने यह बंद केंद्र सरकार के हालिया श्रम सुधारों और आर्थिक नीतियों के विरोध में बुलाया है।

यूनियनों का आरोप है कि नए चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड) नौकरी की सुरक्षा को कम करती हैं और श्रमिकों को मिलने वाली मौजूदा सुरक्षा कमजोर करती हैं। उनका कहना है कि इन बदलावों से कंपनियों के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करना और निकालना आसान हो जाएगा, जिससे श्रमिक अधिकारों पर असर पड़ेगा।

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किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है, जिससे बंद में भागीदारी और प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है। कई क्षेत्रों में प्रशासन आवश्यक सेवाओं और दैनिक गतिविधियों में संभावित बाधाओं के लिए तैयारी कर रहा है। इस हड़ताल का समर्थन करने वाली प्रमुख यूनियनों में सीटू, एआईटीयूसी, इंटक, एचएमएस, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं।

श्रम कानूनों के अलावा यूनियनें ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन बिल और शांति अधिनियम का भी विरोध कर रही हैं। साथ ही वे मनरेगा की बहाली और विकसित भारत रोजगार मिशन कानून 2025 को रद्द करने की मांग कर रही हैं। व्यापक भागीदारी के चलते यह बंद देशभर के दैनिक जीवन पर बड़ा असर डाल सकता है।

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