राज्यसभा उपचुनाव: पूर्व टीएमसी सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश बाराइक को भाजपा ने बनाया उम्मीदवार
भाजपा ने पश्चिम बंगाल राज्यसभा उपचुनाव के लिए टीएमसी छोड़कर आए सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश बाराइक को उम्मीदवार बनाया। मतदान 24 जुलाई को होगा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बाराइक को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। यह घोषणा तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने के कुछ ही घंटों बाद की गई।
तीनों नेताओं ने पिछले महीने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही टीएमसी छोड़ दी थी। उन्हें साल्ट लेक स्थित भाजपा के पश्चिम बंगाल मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके तुरंत बाद भाजपा ने उन्हें राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया।
भाजपा में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने टीएमसी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी का राजनीतिक भविष्य समाप्त हो चुका है। उन्होंने चुनाव में हुए रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत पर सवाल उठाते हुए कहा कि "ममता बनर्जी का राजनीतिक अध्याय खत्म हो चुका है।"
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राय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पूर्व सरकारों ने वर्षों तक केंद्र सरकार से टकराव, आंदोलन और बंद की राजनीति को प्राथमिकता दी, जिससे राज्य का विकास प्रभावित हुआ। उनका कहना था कि इसी कारण बड़ी संख्या में बंगाल के युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में राज्य छोड़ना पड़ा।
वहीं प्रकाश बाराइक ने भी कहा कि वाम मोर्चा और टीएमसी सरकारों के दौरान राज्य और केंद्र के बीच तालमेल की कमी से पश्चिम बंगाल को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हुईं। साथ ही उन्होंने उत्तर बंगाल में एम्स, नए मेडिकल कॉलेज, सिलीगुड़ी-दिल्ली बुलेट ट्रेन और हासीमारा में हवाई अड्डे जैसी केंद्र सरकार की विकास योजनाओं का स्वागत किया।
टीएमसी की चुनावी हार के बाद पार्टी में बढ़ते विद्रोह के बीच सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश बाराइक का भाजपा में शामिल होना राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। भाजपा का यह कदम पश्चिम बंगाल की आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।