×
 

ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों ने सतत पर्यावरणीय प्रथाओं पर चार ज्ञान संकलन जारी किए

नई दिल्ली में ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में चार ज्ञान संकलन जारी हुए। इनमें सतत जीवनशैली, वनाग्नि प्रबंधन, हरितीकरण और चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े अनुभव शामिल हैं।

नई दिल्ली में भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के तहत मंगलवार को 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े चार ज्ञान संकलनों का अनावरण किया।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि इन संकलनों में सदस्य देशों के अनुभव, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और साझा प्रयासों को शामिल किया गया है। उन्होंने टिकाऊ और सुरक्षित पृथ्वी के निर्माण के लिए नीति, प्रौद्योगिकी तथा जनभागीदारी के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया।

बैठक में जारी चार संकलनों में सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय अनुभव, अग्रणी प्रथाएं और सफलता की कहानियां, एकीकृत वनाग्नि प्रबंधन की सर्वोत्तम प्रथाएं एवं नवाचारी दृष्टिकोण, एकीकृत परिदृश्य आधारित हरितीकरण के दृष्टिकोण तथा विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व ढांचे और चक्रीय अर्थव्यवस्था की अग्रणी प्रथाएं शामिल हैं।

और पढ़ें: नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने पर्यावरण और जलवायु प्राथमिकताओं पर किया मंथन

इन ज्ञान संकलनों में ब्रिक्स देशों की प्रभावी पर्यावरणीय प्रथाओं, राष्ट्रीय अनुभवों, स्थानीय ज्ञान प्रणालियों और नवाचारी समाधानों को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया है। इनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग तथा आपसी सीख को बढ़ावा देना है।

मंगलवार की मंत्रिस्तरीय बैठक से पहले सोमवार को भारत मंडपम में ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास संपर्क समूह की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित सदस्य देशों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता पर्यावरण मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार ने की।

भारत की अध्यक्षता में सहयोग के चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया—सतत जीवनशैली, वनीकरण एवं वनाग्नि प्रबंधन और आपदा लचीलापन, चक्रीय अर्थव्यवस्था तथा जलवायु अनुकूलन।

अधिकारियों ने कहा कि जलवायु लचीलापन, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, संसाधन दक्षता और सतत विकास आपस में गहराई से जुड़े हैं। इसलिए पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए अलग-अलग उपायों के बजाय एकीकृत रणनीति आवश्यक है।

और पढ़ें: भारत मंगलवार को दिल्ली में ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share