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पश्चिमी गठबंधनों में तनाव के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टारमर चीन पहुंचे

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर 2018 के बाद पहली बार चीन पहुंचे। पश्चिमी तनाव के बीच वे बीजिंग से राजनीतिक-आर्थिक रिश्ते मजबूत करने और वैश्विक संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने बुधवार (28 जनवरी, 2026) को चीन की अपनी यात्रा शुरू की। यह वर्ष 2018 के बाद किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की चीन की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस दौरे का उद्देश्य ऐसे समय में बीजिंग के साथ राजनीतिक और व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करना है, जब पश्चिमी देशों और अमेरिका के बीच रिश्तों में अस्थिरता देखी जा रही है।

स्टारमर का कहना है कि चीन को लेकर ब्रिटेन को संभावित सुरक्षा खतरों के प्रति सतर्क रहना होगा, लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से मिलने वाले अवसरों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। विमान में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “चीन के मामले में रेत में सिर छिपाकर बैठना समझदारी नहीं है। हमारे हित इसी में हैं कि हम संवाद और सहयोग बनाए रखें।”

50 से अधिक शीर्ष कारोबारी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे स्टारमर गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली छियांग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे शुक्रवार (30 जनवरी, 2026) को शंघाई जाकर स्थानीय उद्योगपतियों और अधिकारियों से बातचीत करेंगे।

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यह यात्रा ब्रिटेन-चीन संबंधों में संभावित बदलाव का संकेत मानी जा रही है। बीते वर्षों में हांगकांग में राजनीतिक स्वतंत्रताओं पर कार्रवाई, यूक्रेन युद्ध में रूस को चीन का समर्थन और ब्रिटिश नेताओं पर जासूसी के आरोपों के चलते दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आई थी। चीन के लिए यह दौरा खुद को वैश्विक अस्थिरता के दौर में एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर भी है।

स्टारमर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और नीतियों को लेकर यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों में चिंता बढ़ी है। हालांकि स्टारमर ने स्पष्ट किया कि चीन के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत करने का मतलब अमेरिका से दूरी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ ब्रिटेन के रक्षा, सुरक्षा, खुफिया और व्यापारिक संबंध बेहद मजबूत हैं।

प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि चीन के साथ वीज़ा-मुक्त यात्रा जैसे मुद्दों पर कुछ प्रगति की उम्मीद है, हालांकि उन्होंने संवेदनशील राजनीतिक मामलों पर खुलकर टिप्पणी करने से परहेज़ किया।

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