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केंद्र ने चार श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियम सार्वजनिक किए, 45 दिन में मांगी गई आपत्तियाँ

केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताओं के मसौदा नियम सार्वजनिक कर 45 दिन में सुझाव मांगे हैं, जिनमें मजदूरी, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और गिग वर्कर्स से जुड़े अहम प्रावधान शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने देश में श्रम सुधारों की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के लिए मसौदा नियम (ड्राफ्ट रूल्स) सार्वजनिक कर दिए हैं। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने मंगलवार (30 दिसंबर, 2025) को इन मसौदा नियमों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्री-पब्लिश किया है और आम जनता, संगठनों व अन्य हितधारकों को इन पर प्रतिक्रिया देने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है।

इन नियमों में श्रमिकों की परिभाषा, मजदूरी, रोजगार के विभिन्न प्रकार, ग्रेच्युटी, बोनस और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है। खास बात यह है कि इन नियमों में गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है, जो बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मसौदा नियमों के अनुसार, कार्य सप्ताह की अधिकतम सीमा 48 घंटे निर्धारित की गई है। इसके अलावा, उन कार्यस्थलों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं जहां महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम करती हैं। इसमें सुरक्षा, सुविधाएं और कार्यस्थल पर अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हैं।

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कोड ऑन वेजेज (वेतन संहिता) के तहत बनाए गए नियमों में कुल 18 पुराने नियमों को समाहित किया गया है। इनमें पेमेंट ऑफ वेजेज (प्रोसीजर) रूल्स, 1937, पेमेंट ऑफ वेजेज (नॉमिनेशन) रूल्स, 2009, मिनिमम वेजेज (सेंट्रल) रूल्स, 1950, मिनिमम वेजेज (सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड) रूल्स, 2011 और इक्वल रिम्यूनरेशन रूल्स, 1976 जैसे नियम शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि इन चार श्रम संहिताओं और उनसे जुड़े नियमों का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है, ताकि श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा मिले और नियोक्ताओं के लिए अनुपालन आसान हो सके। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 45 दिनों की अवधि में जनता और संगठनों से कैसी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।

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