×
 

चेरनोबिल फिर खतरे में? ग्रीनपीस की चेतावनी—रेडियोएक्टिव रिसाव का गंभीर जोखिम

ग्रीनपीस ने यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में रेडियोएक्टिव रिसाव का खतरा बताया। क्षतिग्रस्त सुरक्षा ढांचा और युद्ध के कारण मरम्मत बाधित होने से स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठन ग्रीनपीस, जिसकी स्थापना वर्ष 1971 में हुई थी, ने यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन ने कहा है कि संयंत्र की आंतरिक रेडिएशन सुरक्षा परत (शेल) के क्षतिग्रस्त होने के कारण किसी भी समय रेडियोएक्टिव रिसाव का खतरा पैदा हो सकता है। यह चेतावनी चेरनोबिल परमाणु हादसे की 40वीं बरसी से कुछ दिन पहले आई है।

यह हादसा 26 अप्रैल 1986 को हुआ था, जब एक रिएक्टर में विस्फोट होने के बाद भारी मात्रा में रेडिएशन फैल गया था और हजारों लोगों को क्षेत्र खाली करना पड़ा था।

ग्रीनपीस की जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यू सेफ कन्फाइनमेंट (NSC) की सुरक्षा प्रणाली को हाल की मरम्मत के बावजूद पूरी तरह बहाल नहीं किया जा सका है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि आंतरिक ढांचे का कोई हिस्सा ढहता है तो रेडियोएक्टिव पदार्थ वातावरण में फैल सकते हैं।

और पढ़ें: भारतीय सेना का इबादत-ए-शहादत संग्रहालय: आतंकियों से जब्त AK-47, AK-56 सहित हथियारों का प्रदर्शन

चेरनोबिल संयंत्र के निदेशक सर्जेई ताराकानोव ने भी स्थिति को “बहुत खतरनाक” बताया है। उन्होंने कहा कि 1986 की घटना ने दुनिया को यह सिखाया था कि रेडियोधर्मी कण सीमाओं को नहीं पहचानते।

ग्रीनपीस के वरिष्ठ परमाणु विशेषज्ञ शॉन बर्नी ने कहा कि यदि आंतरिक ढांचा ढहता है तो यह “भयानक स्थिति” होगी, क्योंकि इससे अत्यधिक रेडियोएक्टिव धूल और ईंधन कण वातावरण में फैल सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित हुए हैं। फ्रांस ने भी हाल ही में कहा था कि रूसी हमले के बाद सुरक्षात्मक गुंबद की मरम्मत में लगभग 500 मिलियन यूरो की लागत आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा प्रणाली को मजबूत नहीं किया गया, तो चेरनोबिल एक बार फिर वैश्विक पर्यावरणीय संकट का कारण बन सकता है।

और पढ़ें: दक्षिण अफ्रीका महिला बनाम भारत महिला टी20 सीरीज: जानें कब और कहां देखें लाइव प्रसारण

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share