क्या है चीन की पिंगलू नहर? 10 अरब डॉलर की परियोजना से बढ़ी सिंगापुर, अमेरिका और भारत की चिंता
चीन 10 अरब डॉलर की पिंगलू नहर बना रहा है, जो गुआंग्शी को बीबू खाड़ी से जोड़ेगी। इससे सिंगापुर के व्यापारिक प्रभुत्व को चुनौती और चीन का रणनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है।
चीन एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना के तहत पिंगलू नहर (Pinglu Canal) का निर्माण कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 10 अरब डॉलर बताई जा रही है। यह नहर चीन के गुआंग्शी क्षेत्र को सीधे टोंकिन की खाड़ी (बीबू खाड़ी) से जोड़ने का काम करेगी और इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण जल परिवहन एवं व्यापार गलियारों में से एक माना जा रहा है।
इस परियोजना का उद्देश्य चीन के दक्षिण-पश्चिमी और भूमिबद्ध क्षेत्रों को समुद्री मार्गों से सीधे जोड़ना है। नहर के निर्माण के बाद माल ढुलाई का समय और लागत कम होने की उम्मीद है, जिससे चीन का दक्षिणी क्षेत्र दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से व्यापार कर सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल होती है तो सिंगापुर के समुद्री व्यापार केंद्र के रूप में लंबे समय से बने दबदबे को चुनौती मिल सकती है। वर्तमान में एशिया और दुनिया के बीच होने वाले बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार सिंगापुर के बंदरगाहों से होकर गुजरता है। पिंगलू नहर चीन को वैकल्पिक और अधिक सीधा मार्ग उपलब्ध करा सकती है।
इस परियोजना को लेकर अमेरिका भी चिंतित बताया जा रहा है। रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नहर के जरिए चीन को एक सुरक्षित और घरेलू सप्लाई रूट मिलेगा, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा। इससे संकट या संघर्ष की स्थिति में चीन की आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित हो सकती है।
वहीं भारत के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन का बढ़ता आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।
चीन ने इस महत्वाकांक्षी नहर परियोजना के लिए परीक्षण कार्य शुरू कर दिए हैं और इसे भविष्य के व्यापारिक एवं रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।