चीन उत्तर कोरिया पर पकड़ मजबूत कर रहा है, क्या किम जोंग उन तैयार हैं सहयोग के लिए?
चीन उत्तर कोरिया के साथ सीमा और आर्थिक सहयोग बढ़ा रहा है। नई अवसंरचना और व्यापारिक कनेक्शन चीन की राजनीतिक और आर्थिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जबकि किम जोंग उन अमेरिका के लिए रणनीतिक भूमिका निभा सकते हैं।
चीन ने उत्तर कोरिया के साथ अपने पारंपरिक प्रभाव को फिर से स्थापित करने के लिए सीमा पर अवसंरचना और आर्थिक कनेक्शन बढ़ाने की पहल की है। दानडॉन्ग शहर में नए यालू नदी पुल के पास "ट्रक प्रवेश लेन" और "यात्री वाहन प्रवेश लेन" जैसी नई सड़क चिह्नांकित की गई हैं, जो बढ़ते क्रॉस-बॉर्डर यातायात की तैयारी दर्शाती हैं।
किम जोंग उन ने बीजिंग में एक सैन्य परेड में भाग लिया और साथ ही वरिष्ठ आर्थिक टीम को व्यापार और निवेश पर चर्चा करने के लिए भेजा। इसके पांच सप्ताह बाद, चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग प्योंगयांग गए और दोनों देशों ने "नया अध्याय" लिखने की घोषणा की। चीन का लक्ष्य स्पष्ट है: रूस के करीब जाने वाले उत्तर कोरिया पर पारंपरिक प्रभाव को पुनर्स्थापित करना।
सैटेलाइट इमेज और सीमा दौरे से पता चला है कि चीन ने क्वानहे पोर्ट और नानपिंग, सांहे जैसे अन्य सीमा स्टेशनों पर नई सड़कें और सुविधाएं स्थापित की हैं। उत्तर कोरिया ने भी पुल के पास सीमा शुल्क और गोदाम निर्माण किया है।
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बीजिंग ने घोषणा की कि बीजिंग-दानडॉन्ग-प्योंगयांग के बीच पैसेंजर ट्रेन सेवाएं छह साल बाद फिर शुरू होंगी। हालांकि पर्यटन अभी पूरी तरह शुरू नहीं हुआ है, रेलवे कनेक्शन की बहाली से भविष्य में पर्यटन के लौटने की संभावना बढ़ती है।
उत्तर कोरिया के किम जोंग उन ने चीन को अपना सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया है। चीन की निर्यात वृद्धि, श्रम-सघन उत्पादों की खरीद और रणनीतिक धातुओं के अधिग्रहण से उसकी आर्थिक पकड़ मजबूत होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, धीरे-धीरे यह नया सहयोग अमेरिका और वैश्विक मंच पर चीन की रणनीतिक स्थिति को सशक्त करेगा।
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