चिराग पासवान ने आरक्षण पर साफ किया रुख, बोले- समीक्षा भी मंजूर नहीं
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि इसे खत्म करना तो दूर, समीक्षा का प्रस्ताव भी उनकी पार्टी को स्वीकार नहीं होगा।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की दी हुई खैरात नहीं, बल्कि देश के नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। चिराग ने कहा कि आरक्षण को खत्म करने की बात तो दूर, इसकी समीक्षा की कोशिश भी उनकी पार्टी को स्वीकार नहीं है।
चिराग पासवान ने फरवरी 2020 में संसद में दिए अपने बयान का वीडियो साझा करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति उनकी पार्टी की प्रतिबद्धता पूरी तरह कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की समीक्षा या बदलाव को लेकर उनकी पार्टी सहमत नहीं होगी।
चिराग पासवान बिहार के प्रमुख दलित नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान के पुत्र हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वर्ष 2011 में हिंदी फिल्म ‘मिले ना मिले हम’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा। फिल्मों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया।
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वर्ष 2012 में वह लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बिहार की जमुई सुरक्षित सीट से पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2019 में भी वह इसी सीट से दोबारा सांसद चुने गए। अक्टूबर 2019 में उन्होंने पार्टी की कमान संभाली।
अक्टूबर 2020 में राम विलास पासवान के निधन के बाद चिराग के सामने पार्टी और राजनीतिक विरासत को संभालने की चुनौती आई। वर्ष 2021 में उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व में पार्टी के कई सांसद अलग हो गए। इसके बाद चिराग ने अक्टूबर 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का गठन किया और ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नारा दिया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग ने अपने पिता की पारंपरिक सीट हाजीपुर से जीत दर्ज की। उनकी पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बनाया गया।
आरक्षण को लेकर चिराग का ताजा बयान उनकी पार्टी की सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों को लेकर घोषित राजनीतिक स्थिति को दोहराता है।
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