×
 

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने CJI सूर्यकांत की टिप्पणी वापस लेने की मांग की, विकास बनाम पर्यावरण बहस पर बढ़ा विवाद

49 संगठनों और 553 पर्यावरणविदों ने CJI सूर्यकांत की टिप्पणी वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास और पर्यावरण के बीच चयन नहीं होना चाहिए।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत द्वारा 11 मई को की गई मौखिक टिप्पणियों को लेकर विवाद बढ़ गया है। 49 संगठनों, विभिन्न समूहों और 553 पर्यावरणविदों, शिक्षाविदों तथा नागरिकों ने सीजेआई को एक पत्र लिखकर इन टिप्पणियों को वापस लेने की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि एक जिम्मेदार लोकतंत्र अपने नागरिकों को विकास और पर्यावरण के बीच किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं करता। संगठनों का कहना है कि न्यायालय की टिप्पणियों से पर्यावरण से जुड़े जनहित याचिकाओं (पीआईएल) की वैधता पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।

पत्र में यह भी चिंता जताई गई है कि ऐसी टिप्पणियां उन समुदायों और नागरिकों की संवैधानिक भूमिका को कमजोर कर सकती हैं, जो पर्यावरण कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि न्यायिक टिप्पणियां किसी भी तरह से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जनहित मामलों की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

और पढ़ें: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मार्को रुबियो से अहम बातचीत, डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में देशभर के प्रमुख पर्यावरण संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता, शोधकर्ता और शिक्षाविद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों को एक-दूसरे के विरोध में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षरण के बढ़ते खतरे को देखते हुए अदालतों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए, ऐसी किसी भी टिप्पणी से बचना चाहिए जिससे जनता का भरोसा कमजोर हो।

मामले ने अब न्यायपालिका और पर्यावरणीय न्याय के बीच बहस को और तेज कर दिया है, और इस पर आगे की कानूनी व सार्वजनिक चर्चा की संभावना बनी हुई है।

और पढ़ें: केरल में पुलिसिंग में बड़े बदलाव, 1 जून से शुरू होगा ऑपरेशन तूफान नशा विरोधी अभियान

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share