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ईरान युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद, शशि थरूर ने केंद्र का समर्थन किया

ईरान युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद उभरे हैं। शशि थरूर ने संयम की नीति का समर्थन किया, जबकि सोनिया गांधी ने केंद्र की चुप्पी की आलोचना की।

मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद सामने आते दिख रहे हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया है, जबकि पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इसकी आलोचना की है।

केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने कहा कि भारत को इस समय संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि “संयम आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि यह हमारी ताकत को दर्शाता है और यह बताता है कि हम अपने हितों की रक्षा करना जानते हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर भारत को संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी।

थरूर ने यह भी कहा कि इस युद्ध का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले 64 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 से 120 डॉलर के बीच पहुंच गई हैं। इससे पेट्रोल और अन्य ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका असर आम जनता पर पड़ेगा।

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उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को ऊर्जा के स्रोतों में विविधता लानी चाहिए और अधिक व्यापार समझौते करने चाहिए, ताकि इस संकट से निपटा जा सके।

वहीं, सोनिया गांधी ने अपने एक लेख में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को खामेनेई की हत्या पर चुप नहीं रहना चाहिए था। उन्होंने भारत-ईरान के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए सरकार की चुप्पी को “जिम्मेदारी से पीछे हटना” बताया।

हालांकि, भारत ने बाद में संवेदना व्यक्त की और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत कर शांति और संवाद पर जोर दिया है।

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