कनाडा की खुफिया रिपोर्ट में खुलासा: खालिस्तानी तत्वों से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा
कनाडा की CSIS रिपोर्ट में खालिस्तानी तत्वों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है और उनकी उग्रवादी गतिविधियों व फंडिंग नेटवर्क पर गंभीर चिंता जताई गई है।
कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सक्रिय खालिस्तानी तत्व राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। यह रिपोर्ट 2025 की खुफिया आकलन पर आधारित है और इसे शुक्रवार को कनाडा की संसद में पेश किया गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ये समूह उग्रवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए प्रचार गतिविधियां चला रहे हैं और कुछ लोग कनाडाई संस्थानों का उपयोग करके हिंसक एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इन नेटवर्कों के माध्यम से समुदाय के कुछ सदस्यों से धन एकत्र किया जा रहा है, जिसे बाद में हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता है।
CSIS ने 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम विस्फोट की 40वीं बरसी का भी उल्लेख किया है, जिसमें 329 लोगों की मौत हुई थी। इसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया गया है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2025 में कनाडा आधारित किसी खालिस्तानी समूह द्वारा कोई बड़ा आतंकी हमला सामने नहीं आया है।
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एजेंसी ने चेतावनी दी है कि कुछ खालिस्तानी तत्व अब भी कनाडा के भीतर सक्रिय हैं और उनकी गतिविधियां राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा पैदा कर रही हैं। यह भी बताया गया है कि ये तत्व कनाडा की जमीन का उपयोग भारत में हिंसा फैलाने, फंड जुटाने और प्रचार गतिविधियों के लिए करते हैं।
यह एक वर्ष में दूसरी बार है जब CSIS ने खालिस्तानी नेटवर्क को लेकर चेतावनी जारी की है। इससे पहले 2024 की रिपोर्ट में भी इसी तरह की चिंताएं जताई गई थीं।
भारत ने भी लगातार कनाडा में खालिस्तानी गतिविधियों पर चिंता जताई है और ओटावा से सख्त कार्रवाई की मांग की है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में तनाव रहा है, हालांकि अब संबंधों को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हालिया बैठक में भी आतंकवाद और उग्रवाद पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
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