×
 
☰

जातिसूचक टिप्पणी के आरोप में पत्रकार और सीजेपी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज

दिल्ली पुलिस ने एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर एक स्वतंत्र पत्रकार और सीजेपी सदस्यों के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी, सरकारी काम में बाधा और सोशल मीडिया पर मानहानि के आरोपों में एफआईआर दर्ज की।

दिल्ली पुलिस ने सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) विवेक भगत की शिकायत पर एक स्वतंत्र महिला पत्रकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कुछ सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि तीन अक्टूबर को बूटा सिंह गोलचक्कर के पास प्रदर्शन के दौरान जातिसूचक टिप्पणियां की गईं, सरकारी काम में बाधा डाली गई और सोशल मीडिया पर एसीपी की छवि खराब करने की कोशिश हुई। संसद मार्ग थाने में 13 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई।

विवेक भगत ने क्या आरोप लगाए?

शिकायत के अनुसार, विवेक भगत तीन अक्टूबर को जंतर-मंतर पर भारतीय निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात थे। आरोप है कि बूटा सिंह गोलचक्कर के पास एक स्वतंत्र महिला पत्रकार ने उनकी जाति मेघ/मेघवाल को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की और एसीपी पद पर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए।

और पढ़ें: बस में मारपीट मामले में महिला NSUI कार्यकर्ताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

भगत का आरोप है कि दोपहर करीब तीन बजे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पत्रकार ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया और अपने सहयोगियों के साथ बार-बार उनका सामना किया, जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ।

शिकायत में कहा गया है कि उसी शाम संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर एसीपी के खिलाफ नारे लगाए गए। आरोप है कि उन्हें ‘यौन शिकारी’ और ‘संभावित बलात्कारी’ भी कहा गया।

सोशल मीडिया पोस्ट भी जांच के दायरे में

एसीपी ने आरोप लगाया कि एक महिला स्वतंत्र पत्रकार, गजेंद्र सिंह और सीजेपी के कुछ सदस्यों ने एक्स और इंस्टाग्राम पर पोस्ट तथा रील साझा कीं। उनके अनुसार, इससे उन्हें मानसिक परेशानी हुई और सामाजिक व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

शिकायत में अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के नाम भी शामिल हैं। एसीपी को निशाना बनाकर आपत्तिजनक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार पोस्टर बनाने के मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का भी उल्लेख है।

किन धाराओं में मामला दर्ज?

प्राथमिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 356(2) और 3(5) लगाई गई हैं। इनमें सरकारी काम में बाधा, मानहानि और साझा मंशा से किए गए कृत्यों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

महिला पत्रकार की ओर से दर्ज यौन उत्पीड़न की अलग शिकायत अपराध शाखा को भेजे जाने की बात भी कही गई है। मामले की जांच जारी है। आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और एफआईआर में नाम होना अपने आप में दोष साबित नहीं करता।

और पढ़ें: राहुल गांधी का आरोप: दिल्ली पुलिस की पिटाई से केरल की छात्रा की एक कान की सुनने की क्षमता गई

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share