परिसीमन विधेयक फिर से केंद्र के एजेंडे में, रामदास आठवले ने दिया बड़ा संकेत
रामदास आठवले ने संकेत दिया कि परिसीमन विधेयक फिर से संसद में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक टूट और नए गठबंधनों से एनडीए को मजबूत बहुमत मिल सकता है।
परिसीमन विधेयक एक बार फिर केंद्र सरकार के एजेंडे में लौटता नजर आ रहा है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने संकेत दिया है कि सरकार इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में संसद में फिर से पेश करने पर विचार कर रही है।
रामदास आठवले ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां सरकार के पक्ष में हैं और इससे परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने का रास्ता साफ हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों में चल रही टूट और राजनीतिक अस्थिरता का फायदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में विभाजन और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने से एनडीए की ताकत बढ़ी है। रामदास आठवले ने यह भी दावा किया कि आम आदमी पार्टी (आप) के कुछ सांसद भी एनडीए के साथ आ सकते हैं।
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इसके अलावा उन्होंने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) का कांग्रेस से अलग होना भी एनडीए के लिए लाभदायक साबित होगा। उनके अनुसार इन राजनीतिक बदलावों से सरकार को संसद के निचले सदन लोकसभा में मजबूत बहुमत मिल सकता है।
रामदास आठवले ने कहा कि वर्तमान में एनडीए के पास लोकसभा में 293 सदस्य हैं, और विभिन्न दलों में टूट के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बार सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने की संभावना है, जिससे विधेयक को पारित करना आसान हो जाएगा।
गौरतलब है कि परिसीमन विधेयक, जिसे संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 के रूप में भी जाना जाता है, पहले अप्रैल में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन वह पारित नहीं हो सका था।
अब सरकार इसे मानसून सत्र में फिर से पेश करने की तैयारी में है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
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