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मिनियापोलिस प्रदर्शन से जुड़ा मामला: पत्रकार डॉन लेमन गिरफ्तार, वकील का दावा

मिनेसोटा के चर्च में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में पत्रकार डॉन लेमन की गिरफ्तारी हुई है। उनके वकील ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए कानूनी लड़ाई की बात कही।

वकील के अनुसार, पत्रकार डॉन लेमन को मिनेसोटा के एक चर्च में हुई प्रवासी-विरोधी कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह घटना उस समय हुई, जब एक धार्मिक सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने चर्च के भीतर प्रवेश कर नारेबाजी की, जिससे स्थानीय निवासियों और ट्रंप प्रशासन के बीच तनाव और बढ़ गया।

डॉन लेमन को संघीय एजेंटों ने लॉस एंजिलिस में गिरफ्तार किया, जहां वे ग्रैमी अवॉर्ड्स की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उनके वकील एबे लोवेल ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को यह जानकारी दी। हालांकि, 18 जनवरी को हुए इस प्रदर्शन के सिलसिले में उन पर कौन-से आरोप लगाए गए हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह एक मजिस्ट्रेट जज ने अभियोजकों की ओर से पत्रकार के खिलाफ आरोप तय करने की शुरुआती मांग को खारिज कर दिया था।

डॉन लेमन, जिन्हें 2023 में सीएनएन से निकाल दिया गया था, का कहना है कि उनका चर्च में घुसे संगठन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वहां एक पत्रकार के रूप में मौजूद थे और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे थे। उनके वकील ने कहा कि डॉन पिछले 30 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं और मिनियापोलिस में उनका कार्य पूरी तरह संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है।

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वकील ने यह भी कहा कि अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन पत्रकारों को सच्चाई सामने लाने और सत्ता से सवाल पूछने की सुरक्षा देता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि डॉन लेमन इन आरोपों का अदालत में पूरी मजबूती से सामना करेंगे।

इस मामले में एक प्रसिद्ध नागरिक अधिकार वकील और दो अन्य लोगों को भी पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था। अभियोजकों का आरोप है कि इन लोगों ने सेंट पॉल स्थित सिटीज़ चर्च में धार्मिक सेवा को बाधित कर नागरिक अधिकारों का उल्लंघन किया। इस चर्च के पादरी अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एक स्थानीय अधिकारी भी हैं।

प्रदर्शन के दौरान “ICE आउट” और “रेनी गुड के लिए न्याय” जैसे नारे लगाए गए थे। रेनी गुड, तीन बच्चों की मां थीं, जिनकी मिनियापोलिस में एक ICE अधिकारी की गोली से मौत हो गई थी। इसके बाद न्याय विभाग ने नागरिक अधिकार जांच शुरू की। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि जहां चर्च में प्रदर्शन को लेकर त्वरित जांच हुई, वहीं प्रदर्शनकारियों की मौत के मामलों में सरकार का रवैया अलग रहा।

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