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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: फार्मा उद्योग वॉल्यूम से वैल्यू आधारित रणनीति की ओर बढ़ा

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारतीय फार्मा उद्योग जटिल जेनेरिक, बायोसिमिलर्स और नवाचार पर जोर देते हुए वॉल्यूम से वैल्यू आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत का फार्मास्यूटिकल उद्योग अब केवल बड़े पैमाने पर उत्पादन (वॉल्यूम) पर निर्भर रहने के बजाय उच्च मूल्य (वैल्यू) आधारित रणनीति अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। संसद में गुरुवार, 29 जनवरी को पेश किए गए इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारतीय फार्मा उद्योग जटिल जेनेरिक दवाओं, बायोसिमिलर्स और नवाचार पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिससे वह वैश्विक मूल्य श्रृंखला में ऊपर की ओर बढ़ सके।

सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया की कुल जेनेरिक मांग का लगभग 20 प्रतिशत पूरा करता है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने 191 देशों को फार्मा उत्पादों का निर्यात किया, जो इसकी वैश्विक पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि भारत के कुल फार्मा निर्यात का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अमेरिका और यूरोप जैसे कड़े नियामक मानकों वाले बाजारों में जाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी रेखांकित किया गया है कि जेनेरिक दवाओं के अलावा भारत कम लागत वाले टीकों की वैश्विक आपूर्ति में अग्रणी भूमिका निभाता है। भारत दुनिया में डीपीटी, बीसीजी और खसरा जैसे टीकों की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराता है, जिससे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य में उसकी भूमिका और मजबूत हुई है।

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रिपोर्ट के अनुसार, अनुसंधान एवं विकास (R&D), उन्नत विनिर्माण तकनीक और गुणवत्ता मानकों पर बढ़ता जोर भारतीय फार्मा उद्योग को दीर्घकालिक रूप से अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाएगा। यह बदलाव न केवल उद्योग की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि भारत को वैश्विक फार्मा नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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