यूरोपीय संघ और मर्कोसुर देशों के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, 25 साल की बातचीत का अंत
यूरोपीय संघ और मर्कोसुर देशों ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे 90% से अधिक टैरिफ खत्म होंगे और 70 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
यूरोपीय संघ (EU) और दक्षिण अमेरिका के मर्कोसुर देशों के समूह ने शनिवार (17 जनवरी 2026) को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ ही 25 वर्षों से अधिक समय तक चली जटिल और लंबी बातचीत का अंत हो गया। यह करार ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया भर में संरक्षणवाद और व्यापार तनाव बढ़ रहे हैं।
पैराग्वे की राजधानी असुन्सियोन में हुए हस्ताक्षर समारोह को यूरोपीय संघ के लिए एक बड़ी भू-राजनीतिक जीत माना जा रहा है। अमेरिकी टैरिफ नीतियों और चीन के बढ़ते निर्यात के दौर में यह समझौता यूरोपीय संघ की दक्षिण अमेरिका जैसे संसाधन-समृद्ध क्षेत्र में स्थिति को और मजबूत करता है। साथ ही यह संकेत भी देता है कि दक्षिण अमेरिका, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक भू-राजनीतिक रणनीति के बावजूद, विविध व्यापार और कूटनीतिक संबंध बनाए रखना चाहता है।
मर्कोसुर में अर्जेंटीना और ब्राजील जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के अलावा पैराग्वे और उरुग्वे शामिल हैं। बोलीविया भविष्य में इस समझौते से जुड़ सकता है, जबकि वेनेजुएला को ब्लॉक से निलंबित किया गया है। समझौते के तहत अर्जेंटीना के बीफ से लेकर जर्मनी की कारों तक 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर चरणबद्ध तरीके से शुल्क हटाया जाएगा। इससे 70 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं के लिए वस्तुएं सस्ती होंगी और दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार क्षेत्रों में से एक का निर्माण होगा।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस करार को ट्रंप प्रशासन की विघटनकारी नीतियों के खिलाफ एक मजबूत दीवार बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप टैरिफ के बजाय निष्पक्ष व्यापार और अलगाव के बजाय दीर्घकालिक साझेदारी को चुनता है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने इसे वैश्विक सहयोग के लिए एक सकारात्मक कदम बताया, हालांकि उनके समारोह में अनुपस्थित रहने से दोनों व्यापार ब्लॉकों के बीच कुछ तनाव भी उजागर हुआ। अब यह समझौता यूरोपीय संसद की मंजूरी के बाद ही लागू हो सकेगा, जहां इसे लेकर अभी भी विरोध की आशंका बनी हुई है।
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