रूस पर निर्भरता घटाने की यूरोपीय संघ की कोशिश, हंगरी और स्लोवाकिया अलग राह पर
यूरोपीय संघ रूस पर ऊर्जा निर्भरता घटाना चाहता है, लेकिन हंगरी और स्लोवाकिया अब भी रूसी तेल पर निर्भर हैं। ड्रुज़बा पाइपलाइन विवाद से राजनीतिक तनाव बढ़ा।
यूरोपीय संघ (ईयू) जहां रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, वहीं हंगरी और स्लोवाकिया अलग रणनीति अपनाते नजर आ रहे हैं। दोनों देश अब भी रूसी तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि यह निर्भरता आवश्यकता से ज्यादा एक राजनीतिक विकल्प है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन पर दो पड़ोसी ईयू सदस्य देशों — हंगरी और स्लोवाकिया — का दबाव बढ़ गया है। हंगरी ने युद्धग्रस्त यूक्रेन के लिए प्रस्तावित 90 अरब यूरो के ईयू ऋण को रोकने की धमकी दी है, जबकि स्लोवाकिया ने आपातकालीन बिजली आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘द्रुज़बा पाइपलाइन’ है, जो रूस से पूर्वी और मध्य यूरोप के कई हिस्सों तक तेल पहुंचाने वाली दुनिया की सबसे लंबी पाइपलाइनों में से एक है। पिछले महीने इस पाइपलाइन से तेल आपूर्ति रोक दी गई थी। यूक्रेन का कहना है कि रूसी ड्रोन हमले में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, जिससे आपूर्ति बाधित हुई।
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हालांकि हंगरी और स्लोवाकिया का आरोप है कि यूक्रेन राजनीतिक कारणों से पाइपलाइन की बहाली में जानबूझकर देरी कर रहा है।
यूरोपीय संघ पहले ही रूसी गैस और तेल आयात में कमी ला चुका है, लेकिन यह गतिरोध दर्शाता है कि ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियां अभी भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
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