ईयू के कड़े नियमों के दायरे में आया व्हाट्सऐप, कंटेंट पर बढ़ेगी निगरानी
यूरोपीय संघ ने व्हाट्सऐप को बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सूची में शामिल कर उस पर कड़े कंटेंट नियम लागू करने का फैसला किया है, जिससे चैनल्स फीचर पर सख्त निगरानी होगी।
यूरोपीय संघ (ईयू) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप पर सख्त कंटेंट नियम लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यूरोपीय आयोग ने सोमवार को व्हाट्सऐप को उन बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सूची में शामिल कर लिया है, जिन पर कड़े कंटेंट नियम लागू होंगे।
मेटा के स्वामित्व वाला व्हाट्सऐप अब फेसबुक, टिकटॉक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) सहित 26 “बहुत बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स” की सूची में शामिल हो गया है। यह फैसला तब लिया गया जब व्हाट्सऐप के ‘चैनल्स’ फीचर ने यूरोपीय संघ में 4.5 करोड़ मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर लिया।
ईयू के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत व्हाट्सऐप के चैनल्स फीचर को इसके मुख्य मैसेजिंग सर्विस से अलग एक प्रसारण सेवा माना गया है। इसी वजह से इस फीचर पर अब ज्यादा कड़े नियम लागू होंगे। आयोग के बयान के अनुसार, इन नियमों के तहत प्लेटफॉर्म को मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उल्लंघन, चुनावी हस्तक्षेप, अवैध कंटेंट के प्रसार और निजता से जुड़े जोखिमों का आकलन कर उन्हें कम करना होगा।
और पढ़ें: पेरम्बलूर में पुलिस मुठभेड़: पुलिस टीम पर देसी बम फेंकने का आरोपी ढेर
व्हाट्सऐप को इन नियमों का पालन करने के लिए मई के अंत तक का समय दिया गया है। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इन नियमों को “सेंसरशिप” और अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण करार दिया है।
व्हाट्सऐप की पिछले साल जारी डीएसए पारदर्शिता रिपोर्ट के अनुसार, उसके चैनल्स फीचर के यूरोपीय संघ में करीब 5.17 करोड़ मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं।
इससे पहले भी ईयू ने व्हाट्सऐप की एआई सुविधाओं को लेकर जांच शुरू की थी। दिसंबर में मेटा के खिलाफ एंटीट्रस्ट जांच शुरू की गई थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एआई टूल्स का विस्तार ईयू के प्रतिस्पर्धा नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रहा।
ईयू हाल के महीनों में बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियामक कार्रवाई तेज कर चुका है। पिछले महीने एक्स प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता नियमों के उल्लंघन के लिए 12 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाया गया था। मेटा के अन्य प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और इंस्टाग्राम भी भारी जुर्माने के खतरे का सामना कर रहे हैं।
और पढ़ें: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा देने वाला संगठन नहीं माना जाता संयुक्त राष्ट्र: भारत