क्या है गाज़ा का बोर्ड ऑफ पीस? जिसे ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र कहा जा रहा है
ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गाज़ा से शुरू होकर वैश्विक संघर्ष सुलझाने की पहल है, जिसमें भारत को भी आमंत्रण मिला है, लेकिन यूएन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा संघर्ष से शुरुआत करते हुए वैश्विक विवादों को सुलझाने के उद्देश्य से अपने तथाकथित “बोर्ड ऑफ पीस” पहल में भारत को शामिल होने का निमंत्रण दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजा है, जिसे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
ट्रंप ने पत्र में कहा कि उन्हें मध्य पूर्व में शांति को मजबूत करने के “ऐतिहासिक और भव्य प्रयास” में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित करने पर गर्व है। उन्होंने इसे वैश्विक संघर्ष समाधान के लिए एक “साहसिक नया दृष्टिकोण” बताया। हालांकि, भारत इस पहल में शामिल होगा या नहीं, इस पर अभी तक मोदी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
यह निमंत्रण ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के संबंध व्यापार समझौते पर सहमति न बन पाने के कारण दबाव में हैं। फिलहाल भारत के निर्यात पर अमेरिका में 50 प्रतिशत तक का शुल्क लागू है।
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राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि बोर्ड ऑफ पीस गाज़ा में स्थायी शांति लाने और प्रभावी शासन के माध्यम से स्थिरता व समृद्धि सुनिश्चित करेगा। ट्रंप ने अपने पत्र में 29 सितंबर को घोषित गाज़ा शांति योजना और मध्य पूर्व शांति के लिए 20-सूत्रीय रोडमैप का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2803 को भारी बहुमत से अपनाकर इस दृष्टि का समर्थन किया है।
ट्रंप के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस एक नया अंतरराष्ट्रीय संगठन और अंतरिम प्रशासन होगा, जिसमें “प्रतिष्ठित देशों” को शामिल किया जाएगा। यह बोर्ड शुरुआत में गाज़ा संघर्ष पर ध्यान देगा और बाद में अन्य वैश्विक संघर्षों तक विस्तार कर सकता है। बताया गया है कि बोर्ड की अध्यक्षता आजीवन ट्रंप करेंगे।
हालांकि, इस पहल को लेकर यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र के कुछ अधिकारियों ने चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि यह “ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र” बन सकता है, जो मौजूदा यूएन प्रणाली को कमजोर करेगा। चीन, रूस और छोटे देशों की ओर से भी इस पर विरोध की आशंका जताई जा रही है।
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