डोनाल्ड ट्रंप की दखल के बाद फीफा ने अमेरिकी स्ट्राइकर बालोगुन का रेड कार्ड सस्पेंशन वापस लिया, बेल्जियम ने जताई नाराजगी
फीफा ने अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड सस्पेंशन वापस ले लिया है। इस फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के बाद विवाद और बेल्जियम की नाराजगी सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संगठन फीफा (FIFA) ने बड़ा और विवादित फैसला लेते हुए अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड सस्पेंशन वापस ले लिया है। यह निर्णय कथित रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद लिया गया, जिससे फुटबॉल जगत में बहस तेज हो गई है।
बालोगुन को यह रेड कार्ड बोस्निया और हर्जेगोविना के खिलाफ राउंड ऑफ 32 मुकाबले में तारिक मुहारेमोविच पर किए गए फाउल के बाद मिला था। लेकिन अब फीफा ने धारा 27 (FIFA Disciplinary Code) का हवाला देते हुए उनका सस्पेंशन हटा दिया है, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में खेल सकेंगे।
फीफा के इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संगठन का धन्यवाद करते हुए कहा कि “न्याय हुआ है” और इसे एक “गलत निर्णय” को सुधारने जैसा बताया।
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हालांकि, इस फैसले पर रॉयल बेल्जियन फुटबॉल एसोसिएशन (RBFA) ने कड़ी नाराजगी जताई है। बेल्जियम के कोच रुडी गार्सिया ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि फीफा के दफ्तर में 5 जुलाई को यूरोप का 1 अप्रैल मनाया जा रहा है। उन्होंने इस निर्णय को विश्व कप इतिहास का असामान्य फैसला बताया।
RBFA ने भी एक बयान में कहा कि वह सभी संभावित कानूनी विकल्पों की जांच कर रहा है ताकि खेल की निष्पक्षता और नैतिकता की रक्षा की जा सके। हालांकि, कोच गार्सिया ने किसी संभावित अपील या ट्रंप के प्रभाव पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
दूसरी ओर, फीफा ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अनुशासनात्मक संहिता के तहत एक वर्ष की प्रोबेशन अवधि के लिए मैच सस्पेंशन को निलंबित किया गया है। इससे पहले पुर्तगाल के स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो को भी इसी तरह राहत दी गई थी, जब उनका निलंबन टाल दिया गया था।
इस पूरे मामले ने फुटबॉल जगत में निष्पक्षता और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।