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गगनयान मिशन ने हासिल की बड़ी सफलता, इसरो की प्रमुख प्रणालियां और आधारभूत ढांचा लगभग तैयार

गगनयान मिशन की प्रमुख प्रणालियां, लॉन्च ढांचा और प्रशिक्षण लगभग पूरे हो चुके हैं। पहला मानवरहित जी-1 मिशन जल्द लॉन्च होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं।

भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। सरकार ने संसद को जानकारी दी कि मिशन के लिए आवश्यक प्रमुख प्रक्षेपण प्रणालियां, अंतरिक्ष यान के महत्वपूर्ण घटक और आधारभूत ढांचा या तो पूरी तरह तैयार हो चुका है या अंतिम चरण में है। इससे पहले प्रस्तावित पहले मानवरहित जी-1 (G1) मिशन की तैयारियां तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं।

लोकसभा में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लिखित उत्तर में बताया कि गगनयान के पहले मानवरहित मिशन की तैयारियां निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं। वहीं, भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए विकास, परीक्षण और तकनीकी सत्यापन का कार्य भी लगातार जारी है।

सरकार के अनुसार, ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल-3 (एचएलवीएम-3) के सभी प्रणोदन चरणों और संरचनात्मक प्रणालियों का विकास तथा ग्राउंड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह प्रक्षेपण यान अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।

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ऑर्बिटल मॉड्यूल, जिसमें क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल शामिल हैं, के विकास में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दोनों मॉड्यूल की प्रणोदन प्रणालियों का सफल परीक्षण और प्रमाणीकरण पूरा हो चुका है। इसके अलावा पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (ईसीएलएसएस), थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम, डिसेलेरेशन सिस्टम, क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम तथा अत्याधुनिक एवियोनिक्स जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का भी सफल परीक्षण किया जा चुका है।

आपातकालीन स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विकसित क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) भी उन्नत चरण में पहुंच गया है। इसके पांच प्रकार के एस्केप मोटरों का सफल स्थैतिक परीक्षण पूरा हो चुका है और सभी संबंधित संरचनाओं को प्रमाणित किया जा चुका है।

सरकार ने संसद को बताया कि ऑर्बिटल मॉड्यूल प्रिपरेशन फैसिलिटी, गगनयान कंट्रोल सेंटर, गगनयान कंट्रोल फैसिलिटी और क्रू ट्रेनिंग फैसिलिटी स्थापित की जा चुकी हैं। साथ ही सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार) के दूसरे लॉन्च पैड को मानव अंतरिक्ष उड़ान की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाया गया है। इसमें क्रू एक्सेस आर्म, बबल लिफ्ट, आधुनिक चेकआउट सुविधाएं और ज़िप-लाइन आधारित आपातकालीन निकासी प्रणाली जोड़ी गई है।

इसरो ने टीवी-डी1 परीक्षण मिशन, आईएडीटी-01 और आईएडीटी-02 सफलतापूर्वक पूरे किए हैं, जबकि टीवी-डी2 मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सरकार ने बताया कि गगनयात्रियों ने रूस के ग्लावकोसमोस में सामान्य प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और वर्तमान में बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र में मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वहीं, स्वदेशी ईसीएलएसएस प्रणाली का विकास भी जारी है, जिसका प्रदर्शन आगामी मानवरहित गगनयान मिशनों के दौरान किया जाएगा।

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