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होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज में लगी आग, अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज में आग लगने और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव गहरा गया है। कई देशों ने सुरक्षा और वायु रक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच सोमवार तड़के होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज में आग लगने की घटना ने पूरे पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ा दी है। यह घटना ओमान के तट के पास हुई। ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने आग लगने की पुष्टि की है, हालांकि इसके कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले लगभग पांचवें हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी सेना ने व्यापारिक जहाजों को ओमान के तट के करीब से गुजरने की सलाह दी थी, लेकिन ईरान लगातार इस समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण जताता रहा है।

इसी बीच अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोमवार को लगातार नौवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

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अमेरिकी सेना ने यह भी बताया कि इराक में एक गिराए गए ईरानी ड्रोन के विस्फोटक अवशेषों को निष्क्रिय करने के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इसके साथ ही इस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।

दूसरी ओर, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लोरेस्तान प्रांत से मिसाइलों और ड्रोन का नया हमला शुरू किया। इसके बाद बहरीन, जॉर्डन और कुवैत ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दीं। जॉर्डन ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया, जबकि इज़राइल ने भी सीमा क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया।

इस बीच ईरान के डारखोविन स्थित निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर भी अमेरिकी हमले की खबर सामने आई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने स्पष्ट किया कि यह संयंत्र अभी शुरुआती निर्माण चरण में है और वहां कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी।

उधर, कुवैत ने दावा किया कि उसके एक बिजली उत्पादन और समुद्री जल अलवणीकरण संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई। वहीं खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए ईरान पर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

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