अमेरिका-ईरान युद्धविराम पर भारत की पहली प्रतिक्रिया, विदेश मंत्रालय ने शांति की उम्मीद जताई
भारत ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए शांति, कूटनीति और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित व्यापार बहाली पर जोर दिया।
अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम पर भारत ने अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह युद्धविराम क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की दिशा में मददगार साबित हो सकता है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि यह पहल आगे संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देगी, जिससे लंबे समय से जारी संघर्ष का समाधान निकल सके।
MEA ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व पर जोर दिया, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। भारत ने कहा कि इस मार्ग से निर्बाध और सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।
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बयान में कहा गया, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की ओर ले जाएगा। जैसा कि हम पहले भी कहते रहे हैं, तनाव में कमी, संवाद और कूटनीति इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं।”
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को दो सप्ताह के लिए टालने की घोषणा की है। उन्होंने इसे “दोतरफा युद्धविराम” बताया, जिसके तहत दोनों देशों से आक्रामक गतिविधियों से बचने की उम्मीद है।
ट्रंप के अनुसार, यह निर्णय ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की सहमति के बाद लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने प्रमुख सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है और ईरान से 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
यह घटनाक्रम कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, हालांकि आगे की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
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